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51 से 100 वर्ष तक के बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इंटरनेट और स्मार्टफोन अकेलेपन को दूर करने और लाइफ में उमंग बनाए रखने की एक संजीवनी बन चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले खाली समय का सही उपयोग करने के लिए वे मोबाइल का भरपूर सहारा ले रहे हैं। डिजिटल तकनीक ने सीनियर सिटिजन्स को एक ऐसी सुविधा दी है, जिससे वे घर बैठे पूरी दुनिया और अपने परिवार से हर पल जुड़े रह सकते हैं।
इस उम्र में भक्ति और आध्यात्म का गहरा जुड़ाव होता है। बुजुर्ग अपने मोबाइल पर भक्ति ऐप्स के जरिए रोजाना हनुमान चालीसा, आरती, और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ सुनते हैं। यूट्यूब पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों के लाइव दर्शन (जैसे काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल, और वैष्णो देवी) देखना और कथावाचकों के प्रवचन सुनना उनका सबसे पसंदीदा समय बिताने का तरीका है। कई बुजुर्ग तो ई-तीर्थयात्रा और ऑनलाइन पूजा-अर्चना बुकिंग जैसी सुविधाओं का भी लाभ इंटरनेट के माध्यम से उठा रहे हैं।
मनोरंजन की बात करें तो 50 से 70 के दशक के सदाबहार पुराने हिंदी गाने (जैसे लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, और किशोर कुमार के गाने) सुनना बुजुर्गों को पुरानी यादों में ले जाता है। वे यूट्यूब या Saregama Carvaan ऐप्स पर ब्लैक एंड व्हाइट दौर की क्लासिक फिल्में देखना बेहद पसंद करते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य से जुड़े नुस्खे, जैसे घुटनों के दर्द के उपाय और प्राणायाम के वीडियो देखना भी इनकी इंटरनेट सर्च में शामिल होता है।
सामाजिक जुड़ाव के लिहाज से WhatsApp और Facebook इनके लिए बेहद खास हैं। दूर देश या दूसरे शहरों में रहने वाले बच्चों, पोते-पोतियों और नाती-नातिनों से Video Call पर बात करके चेहरे पर मुस्कान लाना इनकी दिनचर्या का सबसे हसीन हिस्सा है। गुड मॉर्निंग के संदेश भेजना, पारिवारिक तस्वीरें देखना और पुरानी यादों को डिजिटल रूप से शेयर करना बुजुर्गों को मानसिक रूप से तरोताजा और खुश रखता है।