मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026

वेलिंगटन की ठंडी बयार और गगनचुंबी छक्कों की गूंज: भारत ने तीसरे टी-20 क्रिकेट क्रीड़ा आयोजन में न्यूजीलैंड को दी पराजय

सुदूर दक्षिण प्रशांत महासागर की गोद में बसे न्यूजीलैंड की राजधानी वेलिंगटन का मौसम अपने अनूठे मिजाज के लिए संपूर्ण विश्व में विख्यात है। आज जब इस खूबसूरत शहर के स्काई स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा टी-20 क्रिकेट क्रीड़ा आयोजन प्रारंभ हुआ, तो यहाँ का वातावरण किसी मनमोहक प्राकृतिक दृश्य से कम नहीं था। चारों ओर फैली हरियाली, दूर क्षितिज पर पहाड़ियों को चूमती हुई ठंडी और तेज समुद्री हवाएँ, तथा हल्के बादलों के बीच लुकाछिपी करता सूरज—इस पूरे परिवेश ने इस रोमांचक मुकाबले को और भी अधिक सुहाना बना दिया था। मौसम में हल्की सिहरन पैदा करने वाली ठंडक थी, लेकिन जैसे-जैसे क्रीड़ा आगे बढ़ी, मैदान पर भारतीय बल्लाकारों के प्रहारों ने इस ठंडे वातावरण में भी दर्शकों के बीच जोश की एक भयंकर ऊष्मा भर दी।

पहले से ही शृंखला के शुरुआती दोनों टी-20 क्रिकेट क्रीड़ा आयोजनों को अपने नाम कर अजेय बढ़त और बुलंद आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरे भारतीय क्रिकेट दल ने शुरुआत से ही मेजबान टीम पर अपना शिकंजा कस लिया था। न्यूजीलैंड के तेज गेंदकारों ने इस ठंडी और नमी भरी आबोहवा का लाभ उठाकर स्विंग प्राप्त करने का प्रयास किया, किंतु भारतीय बल्लाकारों के इरादे कुछ और ही थे। भारतीय पारी का आगाज करने उतरे युवा और आक्रामक बल्लाकार अभिषेक शर्मा ने अपनी विशिष्ट बल्लाकारिता का ऐसा अद्भुत और प्रलयकारी प्रदर्शन किया कि वेलिंगटन की सर्द हवाओं में भी विपक्षी गेंदकारों के माथे पर पसीने की बूंदें झलक उठीं। अभिषेक ने अपनी कलात्मक और गगनचुंबी बल्लाकारिता के बल पर मैदान के चारों ओर ऐसे स्ट्रोक लगाए, जिससे कीवी गेंदकारों की हर गेंदकारी दिशाहीन नजर आने लगी। उन्होंने शुरुआती ओवरों में ही चौकों और छक्कों की झड़ी लगाकर रनों—यानी दौड़—का अंबार लगाना शुरू कर दिया।

अभिषेक शर्मा के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे बाल-बल्लाकार वैभव सूर्यवंशी ने अपनी अद्भुत परिपक्वता और साहसिक बल्लाकारिता का परिचय दिया। कम आयु के बावजूद वैभव के शॉट चयन और क्रीज पर उनकी स्थिरता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य अत्यंत सुरक्षित हाथों में है। वैभव ने न केवल अभिषेक द्वारा बनाए गए दबाव को पूरी तरह से समाप्त किया, बल्कि अपनी सधी हुई बल्लाकारिता से रन-गति को भी कम नहीं होने दिया। उन्होंने मैदान की हर दिशा में शानदार कट और ड्राइव लगाते हुए तेजी से व्यक्तिगत दौड़ पूरी की और स्कोरबोर्ड को निरंतर गतिशीलता प्रदान की। इन दोनों युवा बल्लाकारों की आक्रामकता और सूझबूझ के अद्भुत तालमेल के चलते भारतीय दल ने लक्ष्य की ओर अत्यंत तीव्रतापूर्वक कदम बढ़ाया और बिना किसी बड़े संघर्ष के निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर तीसरे टी-20 क्रिकेट क्रीड़ा आयोजन को अपने नाम कर लिया।

वेलिंगटन की इस ऐतिहासिक विजय ने भारतीय दल के अजेय अभियान को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। सुदूर परदेश की सर्द जलवायु, अनूठे पर्यावरण और कीवी दर्शकों के शोर के बीच भारतीय बल्लाकारों और गेंदकारों ने जिस अनुशासन का परिचय दिया, वह हमेशा स्मरणीय रहेगा। इस अविस्मरणीय जीत के साथ ही भारतीय क्रिकेट दल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी सर्वोच्चता का परचम लहरा दिया है।

क्रीड़ा आयोजन के मुख्य आंकड़े

आज के इस रोमांचक क्रिकेट क्रीड़ा आयोजन में न्यूजीलैंड की टीम ने पहले टॉस जीतकर अपनी निर्धारित 20 ओवरों की पारी में 5 विकेट के नुकसान पर कुल 184 रनों की चुनौती पेश की। न्यूजीलैंड की ओर से सलामी गेंदकारी और आक्रामक बल्लेबाजी का संयोजन देखने को मिला, जिसमें उनके मध्य क्रम के बल्लेबाजों ने कुछ आकर्षक चौकों की मदद से सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। भारतीय गेंदकार दल की ओर से कसी हुई गेंदकारी का प्रदर्शन किया गया, जिसमें स्पिन और सीम दोनों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला, और कीवी बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने से रोका गया। इसके जवाब में उतरी भारतीय टीम ने लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार शुरुआत की और मात्र 17.4 ओवरों में ही 2 विकेट के नुकसान पर 187 दौड़ें पूरी कर लीं। इस प्रकार भारतीय दल ने इस तीसरे टी-20 क्रिकेट क्रीड़ा आयोजन को 8 विकेट के बड़े अंतर से अपने नाम कर लिया। सलामी बल्लाकार अभिषेक शर्मा ने अपनी तूफानी पारी में सर्वाधिक रन बनाए, जबकि वैभव सूर्यवंशी ने भी उनका बखूबी साथ निभाते हुए मैच जिताऊ पारियां खेलीं।

दीपोत्सव का रंग-उत्सव: गलियों से महानगरों तक उमड़ता जन-उल्लास और भारतीय अर्थव्यवस्था का महा-पर्व

दशहरा (विजयादशमी) के समापन के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप के सांस्कृतिक वातावरण में एक नव-ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार होने लगता है। असत्य पर सत्य की विजय का पर्व बीतते ही हवा में हल्की गुलाबी ठंड की दस्तक होती है और इसके साथ ही आरंभ होता है—दीपोत्सव यानी दिवाली का अभूतपूर्व उत्सव। दशहरा समाप्त होते ही घरों, उप-नगरों और महानगरों में एक मौन किंतु तीव्र आर्थिक व सामाजिक हलचल आरंभ हो जाती है। इसके तुरंत पश्चात आने वाले करवाचौथ के व्रत की तैयारियों से लेकर घर-घर में होने वाली साफ-सफाई, पुताई, झालरों की सजावट और बाजारों में उमड़ती अपार भीड़ तक, यह पूरा घटनाक्रम भारत की उस सांस्कृतिक जिजीविषा का परिचायक है, जिसमें प्रत्येक नागरिक अपनी निष्ठा और क्षमता के अनुसार सहभागी बनता है।

पारंपरिक, सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत हर्षोल्लास का दृष्टिकोण

पारंपरिक और पारिवारिक धरातल पर दिवाली केवल एक दिन का पर्व न होकर एक लंबी प्रक्रिया है। विजयादशमी बीतते ही भारतीय परिवारों में ‘दिवाली की सफाई’ का महा-अभियान प्रारंभ होता है। घर का कोना-कोना बुहारा जाता है, अवांछित वस्तुओं का निस्तारण होता है और दीवारों को नव-जीवन देने के लिए पेंट तथा चूने की गंध हवा में तैरने लगती है। करवाचौथ का व्रत इस लंबी तैयारी का प्रथम मुख्य पड़ाव बनता है। सुहागिन स्त्रियों के लिए मेहंदी के डिजाइनों, रंग-बिरंगी चूड़ियों, पारंपरिक साड़ियों और अलंकृत करवा-पात्रों से बाजार सज उठते हैं। करवाचौथ की यह रौनक दिवाली के मुख्य उत्सव के लिए एक भव्य पृष्ठभूमि तैयार करती है।

जैसे-जैसे धनतेरस और मुख्य दिवाली की तिथि समीप आती है, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक उल्लास अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है। संध्या होते ही दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों की ऊंची अट्टालिकाओं से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों की मिट्टी के छप्परों तक, रंग-बिरंगी बिजली की लड़ियां और माटी के दीये जगमगाने लगते हैं।

बाजारों का दृश्य इस समय अत्यंत विहंगम और जीवंत होता है। राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, और लाजपत नगर जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में जनसैलाब उमड़ पड़ता है। यही स्थिति जयपुर के जौहरी बाजार, लखनऊ के अमीनबाद और वाराणसी के चौक बाजारों की भी होती है। ग्रामीण हाट-बाजारों में भी एक विशेष रौनक देखने को मिलती है, जहां किसान अपनी उपज के पारिश्रमिक से परिजनों के लिए नए वस्त्र, खील-बताशे, मिट्टी की मूर्तियां और दीपमालाएं खरीदते हैं।

मिठाइयों की दुकानों पर काजू कतली, सोनपापड़ी, बेसन के लड्डू और पारंपरिक पकवानों की सुगंध वातावरण को सुगंधित कर देती है। बच्चों में पटाखों, फुलझड़ियों और चकरियों को लेकर एक अलौकिक उत्साह दृष्टिगोचर होता है। घर के आंगनों में रंगोली के विविध रंगों—गुलाल, फूलों की पंखुड़ियों और चावल के चूर्ण—से निर्मित सुंदर आकृतियां अतिथियों और मां लक्ष्मी के स्वागत हेतु सजाई जाती हैं। यह पर्व पारिवारिक बंधनों को सुदृढ़ करने, परस्पर गिले-शिकवे मिटाने, तथा उपहारों व शुभकामनाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से सामाजिक सौहार्द को पुनर्जीवित करने का एक पावन अवसर है।

आर्थिक, राष्ट्रीय और धार्मिक दृष्टिकोण

दिवाली का पर्व जितना सामाजिक और भावनात्मक है, उतना ही यह भारत की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय प्रगति और धार्मिक चेतना का मूलाधार भी है।

आर्थिक दृष्टिकोण: 

दिवाली भारतीय व्यापार जगत का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र बिंदु है। इस अवधि में होने वाला व्यापार संपूर्ण वार्षिक कारोबार का एक बड़ा प्रतिशत होता है। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वर्ण-आभूषण, वस्त्र उद्योग, और एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्रों में बिक्री के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं।

महानगरों के बड़े मॉल और डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से लेकर गांव की पगडंडी पर बैठे कुम्हार, दस्तकार और छोटे दुकानदारों तक, यह पर्व धन के प्रवाह को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाता है। मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित झालरें, और पारंपरिक खील-बताशे बेचने वाले छोटे व्यापारियों के लिए दिवाली जीवनयापन और वर्षभर की बचत का मुख्य साधन बनती है। हाल के वर्षों में 'वोकल फॉर लोकल' और स्वदेशी उत्पादों के प्रति बढ़ी जागरूकता ने स्थानीय कारीगरों और सूक्ष्म उद्योगों को अभूतपूर्व आर्थिक बल प्रदान किया है।

राष्ट्रीय दृष्टिकोण: 

राष्ट्रीय स्तर पर दीपोत्सव भारत की विविधता में एकता और सामर्थ्य का प्रतीक है। जब देश के विभिन्न राज्यों, नगरों, उप-नगरों और गांवों में करोड़ों दीये एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो वह संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में विभिन्न प्रांतों के लोग एक साथ मिलकर इस उत्सव को मनाते हैं, जो भारत की साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहजीब) को प्रदर्शित करता है। इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर होने वाली भारी आर्थिक गतिविधियों से देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को गति मिलती है और राजस्व संग्रह में भारी वृद्धि होती है।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण: 

धार्मिक दृष्टि से दिवाली भगवान श्री राम के चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या आगमन और उनके शुभ राज्याभिषेक की स्मृति में मनाई जाती है। अमवस्या की काली रात को असंख्य दीपों के प्रकाश से आलोकित कर देना केवल भौतिक अंधकार को मिटाना नहीं है, बल्कि यह अज्ञान, असत्य और नकारात्मकता पर ज्ञान, सत्य और सकारात्मकता की विजय का प्रतीक है।

धनतेरस पर आरोग्य के देवता धन्वंतरि और समृद्धि के देवता कुबेर का पूजन, तत्पश्चात रूप चतुर्दशी (छोटी दिवाली) और मुख्य दिवाली के दिन धन-धान्य की देवी मां लक्ष्मी तथा बुद्धि के दाता भगवान श्री गणेश का विधानपूर्वक पूजन मनुष्य को यह सीख देता है कि जीवन में समृद्धि के साथ-साथ सद्बुद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का होना अनिवार्य है।

निष्कर्षतः, दशहरा से प्रारंभ होकर करवाचौथ के माध्यम से पल्लवित होने वाला यह दीपोत्सव भारतीय जनजीवन की धड़कन है। यह पर्व महानगरों के आधुनिक चकाचौंध से लेकर ग्रामीण हाट-बाजारों की सरलता तक, संपूर्ण भारतवर्ष को हर्ष, उल्लास, आर्थिक समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश से आप्लावित कर देता है।

वेलिंग्टन का रण—जहाँ हवाओं के रुख के साथ तय होगी भारत-न्यूजीलैंड टी-20 की जंग! The Wellington War—India and New Zealand Collide in a Blockbuster T20 Showdown!

वेलिंग्टन का रण—जहाँ हवाओं के रुख के साथ तय होगी भारत-न्यूजीलैंड टी-20 की जंग!

क्रिकेट के गलियारों में इस समय सिर्फ एक ही चर्चा गूंज रही है—भारत और न्यूजीलैंड के बीच वेलिंग्टन के स्काई स्टेडियम (Hnry Stadium) में खेला जाने वाला रोमांचक तीसरा टी-20 मुकाबला। पांच मैचों की इस रोमांचक श्रृंखला में टीम इंडिया शुरुआती मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर बढ़त बना चुकी है, लेकिन कीवी टीम अपने घर पर पलटवार करने के लिए पूरी तरह बेताब है। वेलिंग्टन की ठंडी हवाएं, मैदान की अनोखी बनावट और दोनों टीमों की आक्रामक बल्लेबाजी इस मैच को क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक थ्रिलर बनाने जा रही है।

वेलिंग्टन की पिच और हवाओं का मनोवैज्ञानिक दबाव

क्राइस्टचर्च के मुकाबलों के बाद जब दोनों टीमें वेलिंग्टन के मैदान पर उतरी हैं, तो यहां की हवाएं खेल का रुख मोड़ने के लिए जानी जाती हैं। इस मैदान पर छक्के-चौके बरसाना आसान नहीं होता क्योंकि हवा की गति बल्लेबाजों के शॉट की दिशा और गति को प्रभावित करती है। कप्तान श्रेयस अय्यर और कीवी कप्तान मिचेल सेंटनर के बीच यह मुकाबला केवल मैदान पर खिलाड़ियों की जंग नहीं, बल्कि रणनीतिक कौशल की भी बड़ी परीक्षा है। भारतीय टीम की बल्लेबाजी इस दौरे पर बेहद आक्रामक रही है, जहाँ अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और संजू सैमसन ने अपनी पारियों से गेंदबाजों के होश उड़ा दिए हैं। वहीं दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के लिए ग्लेन फिलिप्स और टिम सेफ़र्ट जैसे खिलाड़ी किसी भी वक्त मैच का पासा पलटने का माद्दा रखते हैं।

रोमांचक मोड़ पर श्रृंखला का भविष्य

भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में अर्शदीप सिंह और स्पिन विभाग की भूमिका इस मैच में बेहद अहम रहने वाली है। वेलिंग्टन की पिच पर शुरुआती ओवरों में स्विंग मिलना तय माना जा रहा है, जिसका फायदा भारतीय तेज गेंदबाज उठाना चाहेंगे। यदि भारतीय टीम आज का यह मुकाबला अपने नाम कर लेती है, तो श्रृंखला पर उसका कब्जा पक्का हो जाएगा। वहीं, कीवी टीम के लिए यह 'करो या मरो' की स्थिति है। क्या केन विलियमसन की अनुपस्थिति में कीवी शेर जोरदार वापसी करेंगे या मेन इन ब्लू का विजय रथ यूं ही दौड़ता रहेगा? पूरी दुनिया की निगाहें इस महामुकाबले पर टिकी हैं। क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में यह मुकाबला एक यादगार अध्याय लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है!

The Wellington War—India and New Zealand Collide in a Blockbuster T20 Showdown!

The global cricket community is buzzing with unmatched excitement as India takes on New Zealand in the high-stakes 3rd T20I of the ongoing bilateral series at the iconic Sky Stadium (Hnry Stadium) in Wellington. With India dominating the early fixtures riding on explosive performances from their young and dynamic core, the Blackcaps are fired up and desperate to script a turnaround on home turf. Known for its notorious winds, unpredictable pitch conditions, and electric atmosphere, Wellington is all set to host a classic modern-day cricket thriller.

Battling the Wind and Conditions at Wellington

Playing in Wellington is never just about technique; it is a mental battle against the elements. The sweeping stadium winds heavily influence aerial shots, making precise execution mandatory for both batters and bowlers. Indian captain Shreyas Iyer has marshaled his troops brilliantly, with power-hitters like Abhishek Sharma, Tilak Varma, and Sanju Samson tearing through opposition bowling attacks. However, New Zealand—led by the shrewd tactical mind of Mitchell Santner—possesses match-winners like Glenn Phillips and Tim Seifert who can dismantle any bowling unit on their day.

A Defining Moment in the Series

As India looks to seal the series, their pace spearhead Arshdeep Singh and the spin troika face a massive challenge against a wounded yet dangerous Kiwi batting line-up. The powerplay overs will be crucial, especially with the swinging conditions historically favoring seam movement in Wellington. Will India continue their unstoppable overseas dominance, or will New Zealand use their home advantage to keep the series alive? Grab your popcorn, because this clash promises edge-of-the-seat entertainment that will shake up the blogging world and captivate fans worldwide!

 


सीनियर सिटिजन्स (51 से 100 वर्ष): भक्ति मार्ग, पुराने गानों की यादें, ई-तीर्थ और अपनों से वर्चुअल जुड़ाव

 51 से 100 वर्ष तक के बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इंटरनेट और स्मार्टफोन अकेलेपन को दूर करने और लाइफ में उमंग बनाए रखने की एक संजीवनी बन चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले खाली समय का सही उपयोग करने के लिए वे मोबाइल का भरपूर सहारा ले रहे हैं। डिजिटल तकनीक ने सीनियर सिटिजन्स को एक ऐसी सुविधा दी है, जिससे वे घर बैठे पूरी दुनिया और अपने परिवार से हर पल जुड़े रह सकते हैं।

इस उम्र में भक्ति और आध्यात्म का गहरा जुड़ाव होता है। बुजुर्ग अपने मोबाइल पर भक्ति ऐप्स के जरिए रोजाना हनुमान चालीसा, आरती, और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ सुनते हैं। यूट्यूब पर देश के प्रसिद्ध मंदिरों के लाइव दर्शन (जैसे काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल, और वैष्णो देवी) देखना और कथावाचकों के प्रवचन सुनना उनका सबसे पसंदीदा समय बिताने का तरीका है। कई बुजुर्ग तो ई-तीर्थयात्रा और ऑनलाइन पूजा-अर्चना बुकिंग जैसी सुविधाओं का भी लाभ इंटरनेट के माध्यम से उठा रहे हैं।

मनोरंजन की बात करें तो 50 से 70 के दशक के सदाबहार पुराने हिंदी गाने (जैसे लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, और किशोर कुमार के गाने) सुनना बुजुर्गों को पुरानी यादों में ले जाता है। वे यूट्यूब या Saregama Carvaan ऐप्स पर ब्लैक एंड व्हाइट दौर की क्लासिक फिल्में देखना बेहद पसंद करते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य से जुड़े नुस्खे, जैसे घुटनों के दर्द के उपाय और प्राणायाम के वीडियो देखना भी इनकी इंटरनेट सर्च में शामिल होता है।

सामाजिक जुड़ाव के लिहाज से WhatsApp और Facebook इनके लिए बेहद खास हैं। दूर देश या दूसरे शहरों में रहने वाले बच्चों, पोते-पोतियों और नाती-नातिनों से Video Call पर बात करके चेहरे पर मुस्कान लाना इनकी दिनचर्या का सबसे हसीन हिस्सा है। गुड मॉर्निंग के संदेश भेजना, पारिवारिक तस्वीरें देखना और पुरानी यादों को डिजिटल रूप से शेयर करना बुजुर्गों को मानसिक रूप से तरोताजा और खुश रखता है।

मिडल ऐज (40 से 50 वर्ष): हेल्थ-केयर, स्पिरिचुअल पीस, प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट और वेल्थ मैनेजमेंट

 40 से 50 वर्ष का आयु वर्ग जीवन के एक ऐसे पड़ाव पर होता है जहाँ करियर और परिवार दोनों काफी हद तक सेटल हो चुके होते हैं। इस उम्र में लोग अपनी सेहत, मानसिक शांति और भविष्य के वित्तीय सुरक्षित चक्र पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। मोबाइल और इंटरनेट इनके लिए जानकारी जुटाने, सेहत का ध्यान रखने और आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का सबसे सुलभ जरिया है।

इस ऐज ग्रुप के लिए स्वास्थ्य सबसे बड़ा मुद्दा होता है। यही वजह है कि वे यूट्यूब और गूगल पर आयुर्वेद, घरेलू नुस्खे, योग, वेट लॉस, और ब्लड प्रेशर या शुगर कंट्रोल करने के टिप्स से जुड़े वीडियो खूब देखते हैं। Practo और PharmEasy जैसे ऐप्स से ऑनलाइन डॉक्टर कंसल्टेशन लेना और दवाइयां मंगवाना इनकी आदत में शामिल हो चुका है। मॉर्निंग वॉक के दौरान मोबाइल पर वॉक-ट्रैकिंग ऐप्स का उपयोग करना और मेडिटेशन म्यूजिक सुनना इस उम्र के लोगों को बहुत पसंद आता है।

आध्यात्मिकता और मानसिक शांति इस वर्ग की दूसरी सबसे बड़ी पसंद है। YouTube और Facebook पर भागवत कथा, गीता सार, ध्यान (Meditation) तकनीक, मोटिवेशनल स्पीचेज और भजन सुनना इनका पसंदीदा रूटीन है। वे रोजाना अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को व्हाट्सएप पर प्रेरणादायक विचार (Motivational Quotes) और सुविचार भेजना पसंद करते हैं। इसके अलावा फेसबुक पर अपने पुराने स्कूल और कॉलेज के दोस्तों से दोबारा जुड़ना इन्हें बहुत खुशी देता है।

फाइनेंशियल प्लानिंग के मामले में, 40 से 50 साल के लोग रिटायरमेंट फंड्स, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम्स, रियल एस्टेट में निवेश और पीपीएफ (PPF) से जुड़े अपडेट्स इंटरनेट पर सर्च करते हैं। वे खबरों के लिए Dainik Jagran, Navbharat Times जैसे न्यूज पोर्टल्स और न्यूज ऐप्स पर रोजाना देश-दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पैनी नजर रखते हैं। यह वर्ग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत ही जिम्मेदारी और समझदारी के साथ करता है।