बच्चों, कैसे हो? डिटेल जरूर पढें। आपके लिये जरूरी जानकारी है इसमें।
आशा है आप अपने माता-पिता और दूसरे परिवार जनों के साथ स्वस्थ होंगे।
प्रस्तुत है आज तुम्हारे लिये सूर्योदय के समय दिखी पर्वतीय मादा पक्षी घुघूती।
वह घुघूगु घुघूगु कर रही है। ज्यादा देर बैठी न रह सकी।
जैसे ही मैं क्लोज वीडियो शॉट लेने निकट गया, वह फुर्र से उड़ गयी।
घुघूती की घुघूगु धुन बहुत मधुर होती है।
कोयल और घुघूती का सुर सबसे मीठा होता है।
इसके बाद नंबर आता है गोरैया का।
यह वीडियो गिफ्ट उन बच्चों के लिये है, जो महानगरों में रहते हुये यह सब कुछ देख-सुन-महसूस नहीं कर पाते।
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गुरुवार, 8 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola बच्चों केलिये~वीडियो गिफ्ट~ये है कठफोड़वा पक्षी~पेड़ों ...
बुधवार, 7 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola बच्चों केलिये~वीडियो गिफ्ट~गेहूं फसल~पक चुकी~कटने को ...
इस वीडियो में दिख रहा है कि गेहूं की फसल पूरी तरह पक चुकी है।
फसल कटने को तैयार है।
सूर्य किरणों के बिना भी और सूर्य किरणों के साथ भी सुंदर, सोने जैसी चमकती फसल।
बच्चों यही होते हैं गेहूं।
पूरे भारत में गेहूं की फसल काटी जा रही है।
कहीं-कहीं कट चुकी है। कहीं अब कटेगी।
बच्चों, गेहूं की फसल पकने, कटने और साफ करके इकट्ठा करने की खुशी में ही बैसाखी और गुड़ी पड़वा त्योहार भारत में मनाया जाता है।
इसी दिन यानी (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) से हिन्दू नववर्ष आरंभ होता है।
यह दिन आर्य समाज की स्थापना का दिन भी है।
प्रकृति द्वारा हमें गेहूं अन्न दिया गया।
कृषकों ने अन्न उगाने में हाथ बंटाया, परिश्रम किया।
प्रकृति और किसानों को याद करने का दिन भी है बैसाखी।
बच्चों, इसी गेहूं को पीसकर आटा बनता है।
आटे की रोटियां और परांठे तो तुम रोज ही खाते हो।
जानते हो बच्चों, बारीक पिसे हुये आटे से ही मैदा भी बनता है।
मैदे के बने समोसे, जलेबी, चाऊमीन, मोमोज और दूसरे पकवान भी तुम खाते ही रहते हो।
तो याद रखो, ये सारी खाने की चीजें हमें गेहूं से ही मिलती हैं।
इसी गेहूं की फसल को वीडियो में दिखाया गया है।
यह वीडियो गिफ्ट उन बच्चों के लिये है, जो महानगरों में रहते हुये यह सब कुछ देख-सुन-महसूस नहीं कर पाते।
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मंगलवार, 6 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola बच्चों के लिये~वीडियो गिफ्ट~सुबह~पूरब~पर्वत के पीछे~स...
बच्चों, कैसे हो? डिटेल जरूर पढें। आपके लिये जरूरी जानकारी है इसमें।
आशा है आप अपने माता-पिता और दूसरे परिवार जनों के साथ स्वस्थ होंगे।
प्रस्तुत है आज तुम्हारे लिये पूर्व दिशा में पर्वत के पीछे से सूर्योदय।
मौसम धुंधीला है। बादल लगे हुये हैं। वातावरण में आभा नहीं है।
सूर्योदय भी निष्तेज है। सूर्य भी निष्तेज है। उगते सूर्य के सम्मुख चिड़ियों की उड़ान।
यह वीडियो गिफ्ट उन बच्चों के लिये है, जो महानगरों में रहते हुये यह सब कुछ देख-सुन-महसूस नहीं कर पाते।
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चैनल पर उपलब्ध दूसरे वीडियोज के लिंक :
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यदि कोयी महाशय संपर्क करना चाहें, तो मेल करें इस ई-मेल आईडी पर - vikesh34@gmail.com
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सोमवार, 5 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola#बच्चों के लिये~वीडियो गिफ्ट~सुबह-सुबह~चिड़ियों की चहचहाहट
इस वीडियो में प्रकृति है, पेड़-पौधे हैं, पक्षी हैं और पक्षियों की चहचहाहट है।
यह वीडियो गिफ्ट उन बच्चों के लिये है, जो महानगरों में रहते हुये यह सब कुछ देख-सुन-महसूस नहीं कर पाते।
शनिवार, 3 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola गीत गायन~एक प्रयोग~पुराना फिल्मी गीत~कृपया~ईयर फोन लग...
हिन्दी फिल्म का एक पुराना गीत गाया है।
गीत खत्म होने के बाद लगा कि बिना धुन के गाता तो शायद ज्यादा अच्छा गाया जाता।
लेकिन चूंकि गीत में अंतरे बहुत हैं, गीत बहुत लंबा है, इसलिये एक बार में जैसे रिकॉर्ड हुआ वैसा दर्शकों के सामने है।
कयी जगह मुझे गाने में दिक्कत हुयी है।
लेकिन चूंकि वन टेक ओके वीडियो है, माइक इत्यादि आधुनिक उपकरण के बिना सिंपल फोन से शूट हुआ है तो ठीक है।
हां, दर्शकों से निवेदन है कि जब आप अपने महत्वपूर्ण जीवन के बहुमूल्य समय में से 7 मिनट यह वीडियो सुनने-देखने में खर्च करें, तो कृपया इसे ध्यानपूर्वक सुनें-देखें।
यदि दर्शकगण और संगीतप्रेमी ईयरफोन लगाकर यह गाना सुनेंगे तो निश्चित रूप में मेरे गायन और आवाज के बारे में सही निर्णय ले पायेंगे।
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola असंतुलित मौसम के बीच सुंदर और आनंदित संध्या
आज शाम 5.30 बजे के बाद मौसम सुहावना हो गया।
सुबह वायुमंडल की कुरूपता देखकर वीडियो बनाया था।
उसे दर्शकों के साथ शेयर किया।
11 बजे से हवा चलनी शुरू हुयी जो 5.30 शाम को जाकर रुकी।
इस हवा ने वातावरण मैं फैले धूल के गंध को बहा दिया।
शाम को मौसम बहुत ज्यादा सुंदर हो उठा।
इसीलिये वीडियो बनाये बिना न रह सका।
सुबह बिगड़े हुये मौसम को देख जितना मूड खराब था, अभी मन उससे कहीं ज्यादा प्रसन्न है।
गुरुवार, 1 अप्रैल 2021
#VikeshKumarBadola आंधी।। धूल।। प्रकृति असंतुलन।।
होली से डेढ़ माह पहले तक मौसम पूरी तरह असंतुलित था।
माघ-फाल्गुन का ऋतु सौंदर्य अदृश्य था।
होली से एक हफ्ते पहले तक आंधी-तूफान ने पूरे उत्तर भारत को धूल भरे वायुमंडल में बदल दिया था।
आंखों के लिये तो मौसम कुरूप था ही, गर्मी और उमस भी बढ़ गयी।
और इस प्रकार इस बार की होली पिछले 76 वर्षों में सबसे गर्म दिवस के रूप में दर्ज हो गयी।
बार-बार सुनायी पड़ने पर यह बात किसी को इरिटेट कर सकती है।
लेकिन प्रकृति और मौसम के बारे में हमें बार-बार ही नहीं, बल्कि क्षण-क्षण लिखना, बोलना और सोचना पड़ेगा।
इतना ही नहीं, प्रकृति के लिये कुछ करना भी पड़ेगा।
पेड़ नहीं लगा सकते तो मोटर गाड़ियां छोड़कर साइकिल पकड़ लें, किसी वृक्ष व पौधे में सुबह-शाम पानी ही डाल लें।
यह छोटे-छोटे उपाय प्रकृति को सुधारने में बड़े काम आयेंगे।
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