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Tuesday, May 8, 2018

कर्नाटक होने जा रहा कांग्रेसमुक्त


ब बुराई से भरी राजनीतिक सत्‍ता को उखाड़ने की बड़ी चुनौती सामने हो तो अच्‍छे-भले राजनीतिक दलों और उनके नेताओं व कार्यकर्ताओं को वही करना पड़ता है, जो इस समय कर्नाटक चुनाव से पहले होनेवाली विभिन्‍न राजनीतिक रैलियों, भाषणों और आरोपों-प्रत्‍यारोपों में दिखाई दे रहा है। कर्नाटक में बुरी सत्‍ता सिद्धरमैया सरकार है और उसे उखाड़ फेंकने का सारा दारोमदार भाजपा पर है।
विकेश कुमार बडोला 
          मीडिया के कई चैनल और अखबार जो कांग्रेस की गुलामी में चलते थे और चल रहे हैं वे भाजपा, मोदी तथा भाजपा के मुख्‍यमंत्री पद के प्रत्‍याशी येदियुरप्‍पा के उन भाषणों को मुख्‍य समाचार बनाकर पेश कर रहे हैं जिनसे जनता को लगे कि भाजपा कितनी अलोकतांत्रिक और भ्रष्‍ट राजनीतिक पार्टी है। जबकि सच ये है कि चाहे कर्नाटक हो या भारत का कोई अन्‍य प्रदेश सब जगह कांग्रेसी कुशासन का प्रतिवाद करने के लिए केवल राजनीतिक कटाक्षों से कांग्रेसियों को पतित साबित करना भाजपा के लिए पर्याप्‍त नहीं। भाजपा को तो चुनाव के दौरान और चुनाव जीतने पर कांग्रेसियों के खिलाफ अत्‍यंत उग्र होना चाहिए। ऐसा इसलिए होना चाहिए क्‍योंकि भाजपा जिन बहुसंख्‍यक हिंदुओं का देशव्‍यापी राजनीतिक-लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्‍व कर रही है उन लोगों के मनोविज्ञान में कांग्रेस और कांग्रेसी देश को चौतरफा हानि पहुंचाने के लिए केवल और केवल मृत्‍युदंड दिए जाने के दोषी हैं।
          कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के साथ-साथ मोदी व भाजपा भी अपने समर्थकों की नजरों में कुछ कारणों से बुरी तरह खटक रहे हैं। जो कांग्रेसी नेता, जैसे मल्लिकार्जुन खड़गे, अपने चुनावी भाषणों में सीधा-सीधा कह रहे हों कि मुसलमानों को हिंदुओं, भाजपा और मोदी से खतरा है और इसीलिए उन्‍हें एक होकर कांग्रेस को वोट देना चाहिए, मोदी अपने भाषणों में ऐसे नेताओं को कांग्रेस द्वारा उपेक्षित नेता कहकर क्‍यों प्रचारित कर रहे हैं और क्‍यों उन्‍हें जबरदस्‍ती दलितों-पीड़ितों का नेता कह रहे हैं।
मोदी की यह बात ठीक नहीं। मोदी पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा के प्रति भी संवेदना-सम्‍मान जताते हुए कांग्रेस अध्‍यक्ष के उस बयान की निंदा कर रहे हैं जिसमें उन्‍होंने देवगौड़ा को अपमानित किया। देवगौड़ा हों या खड़गे, ये दोनों नेता चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने की इच्‍छा से भाजपा के प्रति कोई आदर्शवाद, ईमानदारी और विनम्रता नहीं दिखा रहे। जब ये भाजपा और मोदी के खिलाफ खुलकर, खुल्‍ला निम्‍नस्‍तरीय विरोध कर रहे हैं तो ऐसे नेताओं के लिए मोदी द्वारा सम्‍मान दिखाना और चुनावी मंच से सहानुभूतियां प्रदर्शित करना खुद भाजपा समर्थकों को ठीक नहीं लग रहा।
जब विशाल भारतीय जनसमूह कांग्रेस और उसके विकृत मानसिकता वाले नेताओं से मोहभंग के कारण भाजपा-मोदी के हिंदुत्‍व और विकास विचार से आंदोलित होकर भाजपा को समर्थन दे रहा है तो मोदी को ऐसे विपक्षी नेताओं और उनकी राजनीतिक शरणस्‍थली कांग्रेस पार्टी को अपने संभाषणों में केवल और केवल उनके कुशासन, पापों, भ्रष्‍टाचार, देशद्रोह के लिए कोसना चाहिए। मोदी सरकार के पास अपने द्वारा किए गए बहुत से विकास कार्यों के आंकड़े व अनुभव हैं जो उन्‍होंने विगत चार वर्षों में देश के लिए किए हैं। कांग्रेसी शासन में कोई ऐसे कार्यों के पूरा होने की कल्‍पना भी नहीं कर सकता था। मोदी को चुनावी सभाओं में इन्‍हीं बातों का उल्‍लेख करना चाहिए।
          मोदी और भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि कांग्रेस नामक कोढ़ से विशाल भारतीय हिन्‍दू जनसंख्‍या को अत्‍यंत ईर्ष्‍या व चिढ़ है। ऐसा हो भी क्‍यों नहीं, क्‍योंकि इसी कांग्रेस के कुशासन में हुए शासकीय पापों ने हिन्‍दुओं को अनेक धार्मिक, सामाजिक और नागरिक अधिकारों से वंचित किया। अपने बहुसंख्‍यक समर्थकों का निष्‍ठापूर्ण प्रतिनिधित्‍व करने के लिए मोदी को कांग्रेस के किसी भी नेता से कोई हमदर्दी दिखाने या उसे कांग्रेस से अलग महान बताने की कोई जरूरत नहीं। जनता अच्‍छी तरह समझती है कि कोई हो, चाहे नेता, कार्यकर्ता या मतदाता, यदि वह कांग्रेसी है तो उसे इस बात की शर्म व संकोच से डूब मरना चाहिए कि वह राष्‍ट्रद्रोही राजनीतिक दल के साथ खड़ा होने का पाप कर रहा है।
          हम सब को सोशल मीडिया में कर्नाटक चुनाव प्रचार के मोदी के भाषणों के वीडियो देखने चाहिए। इन वीडियो को देखने के बाद जो सार्वजनिक टिप्‍पणियां की जा रही हैं उनमें से अधिकांश जय मोदी, वंदे मातरम, जय भारत, जय भाजपा जैसे शब्‍द-युग्मों वाली हैं। ये सभी टिप्‍पणियां हिन्‍दुओं द्वारा की जा रही हैं। और जो टिप्‍पणियां मुसलमान कर रहे हैं उनमें मोदी, भाजपा और भाजपा समर्थकों के खिलाफ अश्‍लील भाषा लिखी जा रही है। मोदी के नाम पर अपशब्‍द लिखे जा रहे हैं। कोई मुसलमान ऐसा नहीं दिखता, जो मोदी के समर्थन में उसी जोश के साथ खड़ा हो जैसे हिन्‍दू खड़े हैं। वे या तो कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं या तटस्‍थ हैं।
सोचनेवाली बात यह है कि क्‍या ऐसे देशद्रोहियों को मोदी सरकार अपने विकास कार्यों से बदल सकती है? ये कभी नहीं बदलेंगे। ये कांग्रेस के साथ ही रहेंगे। क्‍योंकि इन्‍हें पता है कि वह परिवार जो कांग्रेस का कर्ताधर्ता बना हुआ था, बना हुआ है और बचा रहा तो हमेशा बना रहेगा, वह मुसलमान परिवार ही है।
कांग्रेसमुक्‍त भारत बनाने के लिए मोदी को मुसलमानों की जनसंख्‍या पर नियंत्रण करना होगा। अगर मुसलमानों की संख्‍या ऐसे ही बढ़ती रही तो पक्‍का है कि कांग्रेस का अस्तित्‍व इस देश से मिट नहीं सकता। कुछ मुसलिम महिलाएं बेशक भाजपा का समर्थन कर उसे वोट दे दें पर पुरुष ऐसा नहीं करेंगे। चाहे वे अंगूठा छाप हों या पढ़े-‍लिखे, सभी मुसलिम पुरुष अपनी धार्मिक मान्‍यताओं की स्‍थापना के लिए अत्‍यंत कट्टर हैं।
यह बात मोदी को अच्‍छी तरह याद रख लेनी चाहिए। राष्‍ट्रवादी लोगों तक मोदी की व्‍यापक पहुंच तब ही स्थिर हो सकती है जब वे हिंदुत्‍व व राष्‍ट्रवाद से कोई समझौता न करें और मुसलमानों तथा उनके समर्थक देशी-विदेशी नेताओं, मीडियाकर्मियों, मानवाधिकारवादियों, न्‍यायालयी संरक्षकों को रिझाने के लिए कोई भी समावेशी दृष्टिकोण वाली बात ही न करें। क्‍योंकि कुछ भी कर लो, ऐसे लोग राष्‍ट्र व राष्‍ट्रीय भावनाओं के साथ तालमेल कभी नहीं बिठाएंगे।
यह कड़वी सच्‍चाई है। इसे सरकार से लेकर जनता तक स्‍वीकार किया जाना चाहिए। बेशक यह कड़वा सच लोकतांत्रिक मर्यादा के कारण शाब्दिक रूप में सार्वजनिक रूप से बाहर न निकल रहा हो, पर मोदी की रैलियों में ऊर्जा व उमंग से खड़े लोग भगवा ध्‍वज और अन्‍य प्रतीकों के माध्‍यम से यही बात चीख-चीख कर कह रहे हैं।    

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