महत्‍त्‍वपूर्ण आलेख

Cosmetic

loading...

Tuesday, September 12, 2017

दुर्घटनाओं के बीच आशा-किरण

--विकेश कुमार बडोला

ये समय बड़ा कठिन है। मानवता एक अविश्वसनीय शब्द लगने लगा है। चारों ओर घात-प्रतिघात है। प्रतिदिन मानवजनित समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण मनुष्य सैकड़ों-हजारों की संख्या में मौत के मुंह में समा रहे हैं। प्राकृतिक आपदाएं हर ऋतु में कहर ढा रही हैं। क्या बरसात, क्या गरमी क्या सर्दी हर ऋतु में कभी बाढ़ तो कभी भूकंप और कभी मौसमीय रोगों से लोग त्रस्त हैं। कहीं नवजात शिशु मस्तिष्क ज्वर की समुचित चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ रहे हैं तो कहीं वर्षाजनित बाढ़ के प्रकोप में लोग काल-कवलित हो रहे हैं। कहीं आतंकवादी हमलों में निर्दोष लोगों सैन्यकर्मियों की जानें जा रही हैं तो कहीं दुनिया के देशों के परमाणु परीक्षणों प्रतिस्पर्द्धाओं के कारण तृतीय विश्व युद्ध का खतरा सिर पर मंडरा रहा है। कहीं जर्जर आवासीय भवनों के नीचे दबकर लोग प्राण गंवा रहे हैं तो कहीं रेल दुर्घटनाओं में हंसते-खेलते मानवीय जीवन मौत से भिड़ रहे हैं। कहीं परस्पर द्वेष, ईर्ष्या, अधिकार धन लिप्सित होकर हत्याएं हो रही हैं तो कहीं वृद्धजन महीनों से मृत हो, कंकाल में परिवर्तित होकर अपने घर में पड़े हुए हैं। कहीं नौ वर्षीय अबोध बालिका के बलत्कृत होने के उपरांत उसके गर्भधारण प्रसूति की विस्मित करनेवाली घटना हो रही है तो कहीं जिलाधिकारी स्तर के व्यक्ति द्वारा आत्महत्या किए जाने की त्रासदी घट रही है।
अभिषेक पटेल
निश्चित रूप से ये सभी घटनाएं जीवन के प्रति मनुष्यों में निराशा, हताशा और मनोवैज्ञानिक विकार पैदा करती हैं। इन घटनाओं से अप्रत्यक्ष रूप से परिचित लोग भले ही इन घटनाओं पर उतने गहन बोध से निराश हों, जितने इन घटनाओं से प्रत्यक्ष जुड़े, पीड़ित लोग हो रहे हैं, परंतु फिर भी कहीं कहीं किसी किसी रूप में ये तमाम घटनाएं सभी जिंदा लोगों को जीवन के प्रति असुरक्षा से तो भर ही रही हैं। साथ ही साथ इन घटनाओं का एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी समाज पर पड़ता दिख रहा है, जिस कारण लोगों में सामाजिक भावना का क्षरण हो रहा है। लोग आत्मकेंद्रित होने की ओर अग्रसर हैं। यह स्थिति राष्ट्र, समाज, परिवार और व्यक्ति के लिए अत्यंत आत्मघाती है।
अभिषेक पटेल बम लेकर
स्‍कूल से दूर भागते हुए 
सरकार और समाज को इस दिशा में गहनतापूर्वक सोच-विचार कर कुछ ऐसे उपाय करने होंगे, जिससे लोगों में जीवन के प्रति आशा विश्वास बढ़े। वे सद्भावना, सदाचरण, परस्पर प्रेम-मैत्री की भावना से जुड़ें और इन सबसे बढ़कर जीवन के प्रति समुत्साही दृष्टिकोण रखें। इस हेतु सरकार को देश-समाज के परोपकारी, ईमानदारी से अपने कर्तव्य निर्वहन और विशिष्ट सेवा भाव से अपने दायित्वों में लगे हुए लोगों के बारे में संवाद सूचना तंत्र बनाना चाहिए ताकि अन्य लोग भी ऐसे महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा ले सकें।
विगत 25 अगस्त को मध्य प्रदेश के सागर जिले के सुर्खी पुलिस स्टेशन में तैनात हवलदार अभिषेक पटेल ने जो काम किया है, उसके लिए वे महानता प्रेरणा के जीते-जागते उदाहरण बन गए हैं। अभिषेक जब अपने थाना क्षेत्रांतर्गत चितोरा ग्राम के विद्यालय के पीछे एक 10 किलोग्राम वजनी जिंदा बम पड़े होने की सूचना पर निरीक्षण के लिए पहुंचे तो उन्होंने तुरंत थैले सहित बम उठाकर अपने कंधे पर रखा, भागते हुए 1 किलो मीटर तक गए और बम को नाले में फेंक दिया। अभिषेक के साहस और संवेदना ने विद्यालय में उपस्थित 400 बच्चों के जीवन को सुरक्षित कर दिया। पुलिस जांच में ज्ञात हुआ कि एक गुमनाम व्यक्ति ने सौ नंबर डॉयल कर विद्यालय के पीछे बम पड़े होने की सूचना दी थी। सागर स्थित महार रेजिमेंट सेंटर के जवानों ने जिस तरह से बम को निष्क्रिय किया, उससे साफ पता चल रहा था कि बम जिंदा था और फटने पर बहुत विध्वंशकारी होता। हवलदार अभिषेक पटेल के इस महान कार्य के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पचास हजार का नकद पुस्कार दिया।
यह घटना समाज में घट रही नकारात्मक घटनाओं के मध्य एक विश्वास पुंज के समान है। कल्पना करिए यदि वह बम फटता तो विद्यालय में बच्चों का क्या होता। दुर्घटना से हुए जान-माल के नुकसान पर मध्य प्रदेश राज्य सहित संपूर्ण भारत में राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों का एक लंबा दौर चलता, जिसका आखिरी हासिल कुछ होता। लेकिन यहां एक पुलिसकर्मी की दिलेरी ने ऐसा नहीं होने दिया। तो क्या अब ऐसे पुलिसकर्मी के गुण यशोगान और प्रशंसा-सम्मान पर राष्ट्रीय संवाद नहीं होना चाहिए? निश्चय ही होना चाहिए और निरंतर होना चाहिए तथा मानवता पर छाए अनेकों संकट के इस दौर में तो अभिषेक पटेल के लिए विरुदावलियां गाई जानी चाहिए, ताकि समाज में एक-एक व्यक्ति ऐसे ही साहसी संवेदनशील बनने के लिए आत्मप्रेरित हो।
        वह तो किसी जागरूक व्यक्ति ने अभिषेक पटेल का बम लेकर भागते समय का वीडियो बना कर सोशल साइट पर डाल दिया, तब जाकर उनके इस कार्य की पुष्टि हो सकी। सोशल मीडिया पर जिस तरह लोगों ने अभिषेक के इस कार्य की प्रशंसा की है उसे देखते हुए यह आशा की जा सकती है कि अभी समाज में अच्छे परोपकारी कार्यों की प्रतिक्रिया में सामाजिक मतभेद नहीं हैं। अपनी जान की चिंता नहीं करते हुए दूसरों की जान बचाने के लिए किया गया यह कार्य निश्चित रूप से हमारे देश समाज को अच्छाई, परोपकार के मार्ग पर ले जाने हेतु एक चिरस्थायी प्रेरणा बनेगा। हम सभी को भी सामाजिक जागरूकता दिखाते हुए अभिषेक जैसे अन्य लोगों को देश के सामने लाना होगा ताकि वे अपने परोपकारी कार्यों की ऊष्‍मा से दुर्घटनाओं, त्रासदियों तथा आपदाओं से उपजे देशवासियों के बीमार मनोविज्ञान को दुरुस्त कर सकें।

1 comment:

  1. अपनी जान की चिंता नहीं करते हुए दूसरों की जान बचाने के लिए किया गया यह कार्य निश्चित रूप से हमारे देश व समाज को अच्छाई, परोपकार के मार्ग पर ले जाने हेतु एक चिरस्थायी प्रेरणा बनेगा। हम सभी को भी सामाजिक जागरूकता दिखाते हुए अभिषेक जैसे अन्य लोगों को देश के सामने लाना होगा ताकि वे अपने परोपकारी कार्यों की ऊष्‍मा से दुर्घटनाओं, त्रासदियों तथा आपदाओं से उपजे देशवासियों के बीमार मनोविज्ञान को दुरुस्त कर सकें।
    बिलकुल सही
    जागरूक प्रस्तुति ...

    ReplyDelete

Your comments are valuable. So after reading the blog materials please put your views as comments.
Thanks and Regards