Thursday, July 28, 2016

प्रकृति नर्तन

https://www.youtube.com/watch?v=PYJa3mEU2EA इस लिंक पर एक अपना बनाया हुआ वीडियो डाला है। शुरुआती और आखिर शूट्स को भूल कर अगर इसके बीच के उस हिस्से को ध्यान से देखा जाए, जिसमें हरियाली के झरोखे से दिखते और नीले आसमान में धीरे से गुजरते सफेद बादलों का बनना और मिटना चलचित्रित है, तो निश्चित रूप से यह देखने वालों को एक शांत और निराकार उपहार अवश्य दे जाएगा। हमारी जरूरत आखिर में सब कुछ के बाद प्रकृति ही है। हम कितने ही अहंकार में पड़े हों या हमें कितना ही क्रोध आता हो अथवा हम अपने निरर्थक पूर्वाग्रहों से कितने ही व्यथित हों और प्रतिक्रिया में हर बात, घटना और जीवन संस्कार की अनदेखी कर रहे हों, परंतु वास्‍तव में हमारे दिमाग से निकलीं ये सारी उपजें समग्र रूप से व्यर्थ हैं। इनका कहीं कोई मोल नहीं है। जरा अपने चारों ओर देखिए तो। प्रकृति ने श्रावण के रूप में कितना मोहक रूप धारण किया हुआ है। दो-तीन दिन बादलों से ढका आकाश जब कुछ समय या एक दिन के लिए सूर्यप्रकाश में दमकता है तो धरती-आकाश सहित पेड़-पौधों की हरियाली कितनी स्वच्छ और कांतिवान लगती है। यही नैसर्गिक उपक्रम हैं जिन्हें आत्मसात कर हम अपने मानुष होने का उद्देश्य समझ सकते हैं। यह काम भारत देश में राजनीति करने या नौकरी ढूंढने जैसा उलझा हुआ नहीं है। यह उपलब्धि तो आपको अपनी दृष्टि में बदलाव करते ही प्राप्त हो जाएगी।
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This video was shoot by Vikesh Kumar Badola in2014.
YOUTUBE.COM

4 comments:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 29/07/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  2. दिल को सुकून देता बहुत उत्कृष्ट विडियो...प्रकृति की शान्ति अन्दर तक उतर गयी...

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  3. बहुत ही सुन्दर
    https://www.facebook.com/MadanMohanSaxena

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  4. वीडियो देखा मैंने. अच्छा लगा. प्रकृति के साथ हो लें तो कितनी ख़ुशी मिल जाती है.

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