Tuesday, February 23, 2016

शिव को करना ही होगा विषपान

कितना सहा हमने
उसने कितना हमें काटा है
इस तरफ ये
तूफान से पहले का सन्‍नाटा है
अब सह न सकेंगे
मातृभूमि का अपमान
शिव को अब
करना ही होगा विषपान

8 comments:

  1. न सिर्फ विषपान अब तो तीसरा नेत्र भी खोलना होगा ... भस्म करना होगा ऐसे द्रोहियों को ...
    और शिव स्वरूपी तो अब जनता ही है ...

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  2. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 26/02/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 224 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

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  3. या त्रिनेत्र भी खोलना होगा ।

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  4. हाँ..जितनी जल्दी हो अच्छा है.

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  5. क्या बात है ! बेहद खूबसूरत रचना....

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