Saturday, January 31, 2015

जीवन समीकरण

कृपया बिना पूर्वाग्रह (जीवन के सम्‍बन्‍ध में आपका आग्रह, जो कदाचित आपके विचार का ही परिणाम है) तथा बिना किसी ईर्ष्‍या के, अभी तक हमारी स्‍मृतियों में उपलब्‍ध हमारे जीवनात्‍मक इतिहास से तुलना करते हुए, इस युग के इस जीवन समीकरण को देखें। अपने अनुमान, अपने (केवल अपने) अभिमत, अपने विवेक से बताएं कि क्‍या इस समीकरण से किसी आधार पर सहमत हुआ जा सकता है! या हुआ ही नहीं जा सकता!?

सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग  (इनमें केवल हिन्‍दू धर्म का वर्णन था) + कलयुग ×  दुनिया का मानचित्र तैयार × राजपाठ × धर्म वर्गीकरण × हिन्‍दू × मुसलमान × सिख × ईसाई × अन्‍य धर्म मार्गों की वैचारिक स्‍थापना × भारत × अभारतीय आक्रांता × तुर्क × मंगोल × यूनानी × मुगल × अंग्रेज × पुन: धर्म वर्गीकरण × हिन्‍दू × मुसलमान × सिख × ईसाई × अन्‍य अनेक धर्म × कूटनीति × विश्‍व में ईसाई धर्म के स्‍थापनार्थ अंग्रेजों का साम्राज्‍यवाद × आधुनिकता, प्रगतिशीलता का विचार इसीलिए फैला × हिन्‍दू एवं मुसलमान धर्म के आधार पर विभाजन × प्रगतिशील हिन्‍दुओं का विचलन × मार्क्‍स दार्शनिक की समतामूलक विचारधारा का इनके द्वारा कालान्‍तर में गलत अनुमान, अनुप्रयोग × मार्क्‍स से हिन्‍दू-मुसलमान सहित सभी धर्मों के गरीब लोग प्रभावित × अपने धर्म से विमुख होकर मार्क्‍सवाद के समर्थक केवल पथभ्रष्‍ट हिन्‍दू × मूलधर्म अपने श्रेष्‍ठ-मान्‍य लोगों की कमियों से अपने ही लोगों के लिए विरोधी बना × उपधर्मों में से एक धर्म की धर्म के नाम पर व्‍याप्‍त विद्रूपताओं से मानवजाति त्रस्‍त × इसके परिणामस्‍वरूप भी उसके अनुयायी कभी उसके विरोध में नहीं हुए × दुष्‍परिमणाम हिन्‍दू धर्म को नीचा दिखाने के मूल्‍य पर अन्‍य धर्मों के उत्‍थान की बात होती है × आज लोकतन्‍त्र × संभवत: भारत पहला देश जिसके कामकाज की भाषा उसकी अपनी भाषा नहीं, अंग्रेजी है × यहां के लोग हिन्‍दी, प्रादेशिक भाषाएं जानते-बोलते हैं × लोक की भाषा, बोली, जीवन-व्‍यवहार सबका तिरस्‍कार, फिर भी लोकतन्‍त्र, अरे काहे का लोकतन्‍त्र × व्‍‍यक्ति-प्रकृति से विमुख तन्‍त्र लोक है या थोक तन्‍त्र × राजनीति × राजनीतिक पार्टियां × लोगों का विकास × मतदान × प्रधान × पंचायत × नगर निगम × विधान परिषद × विधान सभा × लोक सभा × इतने सारे चुनावी मंच × इतनी समितियां × व्‍यक्ति के जीवन से ज्‍यादा तन्‍त्र के रूप × व्‍यक्ति बीत-रीत जाता है × उसका लोकतान्त्रिक उद्धार नहीं होता × जीवित व्‍यक्ति के केवल विचार में लोकतन्‍त्र × उसके जीवन व्‍यवहार में यह तन्‍त्र गायब × सज्‍जन हर जगह मनमानी का कोपभाजन × राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक मनमानी × समाज × परिवार × वंश × बच्‍चे × उनका भविष्‍य × पढ़ाई × धनार्जन से सम्‍बन्धित पढ़ाई × अपना-प्रकृति-समाज का अज्ञान × अर्थशास्‍त्र × विज्ञान × अधिवक्‍ता × न्‍यायाधीश × राजनीतिज्ञ × पिता × माता × पुत्र× पुत्री × मित्र × सम्‍बन्‍धी × रिश्‍ते-नाते × कलयुग में जीवन का भविष्‍य ढ़ूढना × आधुनिक भाषा में करियर × अमेरिका × परमाणु × चीन × कब्‍जा × पाकिस्‍तान × आतंक × ईरान-इराक × मुसलिम धर्म की स्‍थापना × जापान × परमाणु विरोधी × भारत × परमाणु ऊर्जा हेतु व्‍याकुल × इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शन × वंदे मातरम गायन × मुसलमान × वंदे मातरम विरोधी × भारतीय जनता पार्टी × स्‍वयं सेवक संघ × बजरंग दल × विश्‍व हिन्‍दू परिषद × हिन्‍दू महासभा × साम्‍प्रदायिक × हिन्‍दू बहुल भारत × हिन्‍दु बहुलता के लिए सोचने पर × उक्‍त संगठनों पर साम्‍प्रदायिकता का ठप्‍पा × अल्‍पसंख्‍यक × मुसलमान × सिख × जैन × पादरी × पर अल्‍पसंख्‍यक के केन्‍द्र में अरबों की संख्‍यावाले मुसलमान × मसजिदों की बढ़ती संख्‍या × सुबह-शाम कर्कश ध्‍वनि में लाउडस्‍पीकर का बजना × मुसलमान निर्भीक × आतंक व अवैध कार्यों में लिप्‍त × ठोक बजा के स्‍वीकारोक्ति × तब भी वे तरह-तरह के धर्मनिरपेक्षियों के लिए बेचारे हैं × उनके पक्ष में हिन्‍दू धर्मनिरपेक्षियों का गान × बड़ा कचोटता है × अरब देश × वे तो धनी हैं × तब वहां मुसलिम आतंक क्‍यों × उनके आतंकी होने को उनकी गरीबी व शोषण से जोड़ा जाता है × हिन्‍दू भी तो शोषित हैं × सिख भी पीड़ित हैं × पादरी तो बेचारे रहे ही नहीं × क्‍या ये भी प्रतियोगी आतंक में शामिल हो  जाएं × क्‍या तब भारतीय धर्मनिरपेक्षी इन्‍हें भी बेचारा कहेंगे × अमेरिका × अरब के तेल कुंओं पर नजर × चीन × पूर्वोत्‍तर देश के राष्‍ट्रों पर कब्‍जे की मंशा × भारत कुछ नहीं करेगा × पाकिस्‍तान से जम्‍मू कश्‍मीर तक नहीं ले पा रहा × पूरा सहिष्‍णु देश × कितने सैनिकों के बलिदान कश्‍मीर के लिए × मीडिया विद्वता का ठेका लिए हुए × अमेरिकी राष्‍ट्रपति की भारत यात्रा × गणतन्‍त्र दिवस के मुख्‍य अतिथि × परमाणु ऊर्जा व्‍यापार समझौता × मूल यात्रा उद्देश्‍य अपनी व्‍यापारिक संभावनाएं तलाशना × हमारे मीडिया को परमाणु खतरा नहीं दिखा × जापान के परमाणु संयंत्रों से हुआ विनाश नहीं दिखा × परमाणु ऊर्जा का विरोध नहीं हुआ × अमेरिकी निवेश के दिवास्‍वप्‍न में झूमने  के अलावा × हिन्‍दू धर्म को नीचा दिखाने का मौका अमेरिका नहीं चूका × उसने संविधान १७६ गिनवाया × हमें धार्मिक सहिष्‍णुता सिखाई × मीडिया के लिए यह खबर ऊर्जायुक्‍त थी × जैसे वह इसी वक्‍तव्‍य की प्रतीक्षा में था × मोदी इन सब से निर्लिप्‍त × विकास की मदिरा में झूम रहे हैं × मन की बात कर रहे हैं × एक दिन में कई जोड़ी कपड़े बदल रहे हैं × चाय बेचनेवाला × कपड़ों का प्रचार कर रहा है × जनसंख्‍या नियन्‍त्रण पर कोई नीति नहीं × बस विकास × २०२२ तक सबको मकान × २०२० तक सबको बिजली × बेशक परमाणु ऊर्जा के खतरे पर सही × भारत अमेरिका से भी आगे पहुंच जाएगा × चीन-जापन-कोरिया-फ्रांस-जर्मनी-अरब देशों को पछाड़ कर शीर्षस्‍थ रहेगा × अमेरिका की तरह आईएस से खुद को उड़ाने की धमकी पाएगा × तब भारत भी धार्मिक सहिष्‍णुता का गान गाएगा = ????? (क्‍या आपको इस जीवन गुणनखण्‍ड का कोई हल सूझा? यदि नहीं तो आप भी इसमें अपने सूत्र जोड़िए और हल ढूंढिए। यदि मिल जाएगा तो बताइएगा जरूर)।
विकेश कुमार बडोला

11 comments:

  1. बाप रे ! आपके इस आलेख ने इस द्रुत गति से भ्रमण कराया कि इतिहास , भूगोल और वर्तमान सभी मानो गड्ड-मड्ड हो गए .. भूलभुलैया सा . बाबा ! अपने क्या किसी के वश की बात नहीं है इसका कोई भी छोर निकाल पाना .

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  2. एक नकली दुनिया के मानचित्र में आपके शब्दों-समीकरणों का अंदाज बेहद दिलचस्प है.…

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  3. पूरे कालखंड को समेट लिया है आपने इस लेख में और समस्त स्वप्नों को सम्मुख रख दिया है. मनुष्य आशावान होता है...सोचता है एक दिन तो आयेगा....बहुत कुछ देखना है अभी... सरकार की नीतियों को...सत्ता के असर को देखना है. हम-आप तो बस तो बस एक बात की गारंटी दे सकते हैं-
    नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि....

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  4. रोचक , पहली बार ऐसा कुछ पढा है ।

    इस उलझन से कौनसा सूत्र निकाल सकता है । मानवीय सोच के सिवा ....

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  5. अलग ही अंदाज की ब्लॉग पोस्ट मगर दिलचस्प।

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  6. इन सब का कोई हल होता तो ऐसा होता ही नहीं .. कालचक्र का जवाब किसी के पास नहीं ... सबकी अपनी व्याख्या है, परिभाषा है ... इतिहास को लिखना आसान है वर्तमान को जीना ही पड़ता है पर भविष्य को बांचना सबसे मुश्किल ... ये समीकरण एक दुसरे से जुदा हैं ...

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  7. ये समीकरण बेहद कठिन है,इसे समझ पाना उससे भी अधिक कठिन .नहीं जानती कि भविष्य के गर्भ में क्या है परन्तु इतना तय है कि दुनिया एक ऐसे कगार पर है जहाँ उसका पतन निश्चित है.हम सभी बारूद के ढेर पर ही तो बैठे हैं.
    यह एक अलग तरह का भयावह चक्र है जिसमें सभी जानबूझकर ही फंस रहे हैं.

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  8. your writing skills and thoughts are heart touching keep it up dear
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  9. हरेक सूत्र अपने आप में एक इतिहास समाये. बहुत कठिन है कोई हल ढूँढना, शायद भविष्य के गर्भ में इसका कोई हल हो..

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  10. वाह, यह तो पूरा कालखंड प्रस्‍तुत किया है आपने।

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