Wednesday, July 16, 2014

मन ही मन


वफा का चलन हमेशावाला मैंने नहीं अपनाया
खामोशी से मन ही मन में मैंने तुमको चाहा....................

6 comments:

  1. ये सुन्दर दो पंक्तियाँ एक पूरी कविता भी होसकती है ।

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  2. बहुत कुछ कह दिया दो पंक्तियों में...

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  3. मुहोब्बत में यूं भी चलन नहीं चाहत ही मायने रखती है। सुंदर पंक्तियाँ...:)

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  4. खूबसूरत पंक्तियाँ ...
    पर सच कहूं तो मुझे लगता है प्रेम है तो इज़हार भी करना चाहिए ... जताना भी चाहिए ... ये एक प्रकार का नशा है जिससे बाहर नहीं आना चाहता मन ...

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  5. मन ही मन में रखी बातों का दिलचस्प व सही चित्रण करने वाले ईमानदार कलमकार को सलाम।

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