Monday, February 17, 2014

अन्‍धविश्‍वासों का दायरा

जीवन के गूढ़ दर्शन के विश्‍लेषण में आत्‍मलीन, मानव आवास से सुदूर कन्‍दराओं, गुफाओं, अगम जंगलों में रहनेवाले महात्‍माओं, सन्‍तों की अनगिन वर्षों की तपस्‍या कलिकाल के पाखण्‍डी बाबाओं ने मिट्टी में मिला दी। आज के समय का पारिवारिक, सामाजिक, शासकीय जीवन क्‍या कम मुसीबत में था जो आत्‍मशान्ति के आखिरी ठौर धर्ममार्ग को भी उजाड़ दिया गया? आस्तिकता और नास्तिकता के बीच दुनिया का विश्‍लेषण करनेवाले दिग्‍गजों के लिए चिन्‍ता की कोई बात नहीं है। उन्‍हें भगवान को मानने या न मानने के लिए किसी के ज्ञान की कोई जरुरत नहीं है। वे अपनी कपोल कल्‍पनाओं से जीवन और इसके बाद के सभी सूत्रों, बातों की जानकारी रखते हैं। उन्‍हें अपने पाप, पुण्‍य मोक्षा‍दि की चिंता नहीं है पर वे इन मानसिक पूर्वाग्रहों से पीड़ित लोगों के लिए अवश्‍य चिंतित हैं। क्‍योंकि वे ऐसे अधिसंख्‍य लोगों के बीच रह कर ही जीवन गुजार रहे हैं। आखिर इनके प्रति उनका कोई फर्ज तो बनता ही है।


जिन्‍हें पूजा जाना चाहिए, वे योगी या साधु ऐसे होते हैं
मैं भी आस्तिक व नास्तिक के बीच की कड़ी हूँ। भगवान को मानता भी हूँ और नहीं भी। जब मेरी बुद्धि, विवेक दुरुस्‍त रहता है तो लगता है भगवान है और जब मैं व्‍यक्तिगत भ्रष्टाचार की गिरफ्त में होता हूँ तो नास्तिकता हावी रहती है। पर अपनी उलझन से मुक्ति के लिए मुझे धर्मज्ञानियों, बाबाओं की जरुरत कभी नहीं पड़ी। अपना बाबा मैं खुद ही बना।
स्‍वाभिमान के शिखर पर विराजमान मैं शहरों-नगरों में घूमते, प्रवचन करते बाबाओं से हमेशा खुन्‍दक खाता रहा। अधिकांश धार्मिक लोग जो बाबाओं, सन्‍तों के प्रवचन सुन कर ही खुद को कुछ सोच-समझ रखने लायक समझते उनकी नजरों में मुझ जैसा मूर्ख ही होता। उन्‍नीस साल पहले बारहवीं में मेरे साथ पढ़नेवाली मेरी एक मित्र खुद को अंग्रेजी भाषा की विद्वान और उस समय विशेष की प्रगत लड़की समझती थी। एक दिन पहली बार जब मैंने उसके नए घर की बैठक में टंगी आसाराम की विशाल फोटो देखी तो सहसा मेरे मुंह से निकल गया तुम लोग भी इसके चक्‍कर में आ गए क्‍या’? सुनते ही मित्र ने जो मुखचित्र बनाया उसमें यही आग्रह था कि अभी इस घर से बाहर चले जाओ और आज के बाद हमारी दोस्‍ती खत्‍म। उसके बाद मैं कई दिनों तक हमारी मित्रता खत्‍म होने और मित्र की गुरुभक्ति का अपमान करने के दो दुखों से पीड़ित रहा। लेकिन इसके अलावा मेरे साथ मेरा यह सुखानुभव भी था कि चलो मूर्खता की शरण में गए मूर्ख दोस्‍त से अच्‍छा अपना वो विश्‍वास है, जो उदारीकरण के दौर में उग आए हाई टेक बाबाओं की असलियत को पहचानने की कूवत रखता है। सोचता हूँ आज वह मित्र किस पर विश्‍वास कर रही होगी? बाबा पर, खुद पर या मुझ पर। या उस भगवान को धन्‍यवाद दे रही होगी जिस तक पहुंचने के लिए बाबा ने भक्‍तों के साथ मिल कर न जाने क्‍या-क्‍या पाखण्‍ड खेले होंगे!
बात केवल बाबा पर अंधविश्‍वास की और अंधविश्‍वास की बाबा की ओर की उघड़ी सच्‍चाई की  नहीं है। अंधविश्‍वास की चूलें हिल जाने के बाद भी, बाबागीरी की अत्‍यधिक घृणित सच्‍चाई जानने के बाद भी देशवासियों की प्रतिक्रियाएं खासकर तथाकथित बाबा के भक्‍तगणों की समझौतावादी प्रतिक्रियाएं क्‍या सिद्ध करती हैं, यह जानने की ज्‍यादा जरुरत है। ऐसे मामले में लोगों की सुसुप्‍तावस्‍था इस बात को पुख्‍ता करती है कि चरित्रहीनता की जड़ें लोगों में गहरे पैठ बना चुकी हैं। बाबा के विरुद्ध शिकायत करनेवाले शायद आधुनिक दुनिया के सन्‍त ही थे तब ही तो अपनी लड़की के साथ हुई घटना से उन्‍हें धक्‍का लगा। बाबा ने औरों के साथ भी तो वही किया था जो शिकायत करनेवाली लड़की के साथ किया होगा। तो औरों की माताओं पिताओं को धक्‍का क्‍यूं नहीं लगा। एक तरह से उन लोगों ने स्‍वीकार कर लिया था कि चरित्रहीनता के पक्षकार उनमें और बाबा में कोई खास फर्क नहीं है। दूसरी तरफ बाबा और उसके भक्‍तगणों सहित भारतवर्ष के लोगों ने इतने वर्षों से राजसत्‍ता द्वारा बोई गई चरित्रहीनता की फसल काटने के अलावा आज तक किया ही क्‍या है? इस दृष्टिकोण से तो क्‍या बाबा, उसके भक्‍तगण और क्‍या आम जनमानस सभी ने चरित्रशून्‍यता के ऊपर धूर्तता से लेपी गई खोखली विद्वता ओढ़ रखी है।
इस सन्‍दर्भ में श्रीलाल शुक्‍ल का आचार्य विनोबा भावे द्वारा प्रणत भूदान आंदोलन की पृष्‍ठभूमि में लिखा गया विस्रामपुर का संत उपन्‍यास का प्रमुख पात्र राज्‍यपाल याद आता है। वह सुन्‍दर महिलाओं के सपनों, फतांसियों में जीता है। आंदोलन की एक कार्यकत्री के प्रति आसक्‍त यह पात्र एक दिन गलत नीयत से उसके घर जाता है। वह सो रही होती है और यह उसके नग्‍न मेरुदण्‍ड सहित अनेक अंग-प्रत्‍यंगों को छूने का प्रयास करता है लेकिन फिर न जाने क्‍या सोच कर उलटे पैर वापस हो लेता है। कार्यकत्री को पहले से उसकी नीयत का पता होता है और इसकी चर्चा वह आंदोलन के दूसरे कार्यकर्ता अपने प्रेमी से करती है। प्रेमी राज्‍यपाल का पुत्र होता है। पिता को जब पता चलता है कि वह अपने बेटे की प्रेमिका पर आसक्‍त था तो आज के हिसाब से नगण्‍य इसी अपराधबोध के चलते अन्‍त में वह नदी में कूद कर आत्‍महत्‍या कर लेता है। आज अगर देखें तो विस्रामपुर का यह सन्‍त आसाराम जैसे सन्‍तों से कहीं ऊपर है। इसी प्रकार वरिष्‍ठ कथाकार बल्‍लभ डोभाल की जय जगदीश हरे कहानी आसाराम जैसे विसंगत सन्‍दर्भों को बहुत पहले ही उघाड़ कर रख चुकी है। न जाने आम लोग भक्‍त बनने के फेर में सच्‍चाई से लुटने-पिटने के बाद ही अवगत क्‍यों होते हैं, क्‍या इस सवाल का कोई सही जवाब हो सकता है?

29 comments:

  1. बाबा,ज्ञानी,संत,साध्वी ,कितने पावन दिखते हैं !
    फिर भी देसी अख़बारों में इनके किस्से छपते हैं !

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  2. उघरे अन्त न होइ निबाहू...।

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  3. धर्म के नाम पर अधर्म का खेल खेलने वालों ने वाकई न जाने कितने आस्तिकों को भी नास्तिक बना दिया होगा.
    अफ़सोस है की इतना कुछ सामने आने के बाद भी बाबाओं आदि की अंधभक्ति में लोग अब भी लगे हैं..

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन राय का लेन देन - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. उत्कृष्ट चिंतन, विचारणीय मंथन। बाबा के रूप में हों या राजनेता के, जब-जब निराशा में डूबी जनता को उम्मीद की किरण दिखाकर ठगते हुए देखता हूँ तो संत कबीर के शब्द याद आते हैं, गगन की ओट निशाना है। हमारा लक्ष्य ही इतना क्षुद्र हो गया है कि हारे भी तो बाज़ी मात नहीं से आगे पहुँच ही नहीं पाते, हर चुनाव का यही हाल है। अफसोस!

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  6. धर्म के नाम पर अपनी ओछी हरकत बेचते ये बाबा
    ..

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  7. ऐसे लोग हर युग में रहे हैं ... रामायण काल से महाभारत काल से आज का समय ... हर तरह के लोग साथ साथ रहते आए हैं समाज में ...
    कुछ समय पहले अमीश त्रिपाठी की शिव पे लिखी पुस्तकें पढ़ रहा था ... सच्चाई और बुराई एक ही सिक्के के दो पहलू हैं ... अच्छाई कब बुराई में बदल जाती है पता नहीं चलता ... इन सादुओं में भी कुछ अच्छाई रही होगी तभी समाज ने स्वीकार किया पर वो कब बुराई में बदल गई पता नहीं चल पाता ... समाज रुपी दंड शायद इसी लिए होता है ...

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  8. सब कुछ जानते समझते हुए भी लोग अभी तक नींद में हैं.. बढ़िया लिखा आपने...

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  9. विचारणीय मंथन, बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति ।

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  10. धर्म के बाजार का बढ़ता हुआ दायरा अब नैतिकता का अतिक्रमण कर चुका है.. और अँधा अँधे को बेच रहा है..

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  11. सटीक और सही उदहारणों में लिखा हुआ, खूबसूरत लेख। आजकल के संतों और ढोंगी गुरुओं का चरित्र चित्रण है।

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  12. सच में आज इन तथाकथित साधुओं ने सम्पूर्ण साधु समाज को शक और अविश्वास के घेरे में ला दिया है..पता नहीं कब समाज इन ढ़ोंगी साधुओं के जाल से अपने को मुक्त कर पायेगा..

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  13. वर्तमान में तो आज हर चीज़ बिकाऊ है तो फिर धर्म की क्या बिसात। भोली भली जनता को अपनी मीठी-मीठी बातों में उलझा कर लूटना तो समझ आता है। मगर पढे लिखे बुद्धि जीवी वर्ग का इन ढोंगी बाबाओं के चक्करों में पढ़कर अंधविश्वास को बढ़वा देना मुझे आजतक समझ नहीं आया।

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  14. जब भक्ति का तात्पर्य स्वार्थ सिद्धि हो तो तथाकथिक महात्माओं का उद्भव स्वाभाविक है। दर्शन के विभिन्न विषयो में जीवन का उद्देश्य परिभाषित है। कर्म का वास्तविक लक्ष्य भी चिन्हित है। इस दर्शन को जब जीवन के विषय भोग कि प्राप्ति का अगर माध्यम मन लिया जाय तो स्वाभाविक रूप से उसके तथाकथित द्रष्टा इसमें आसक्ति को पहचानते है। इसका भी अपना एक अर्थ शास्त्र है। जिनपर ऐसे महात्मा चढ़ कर आगे बढ़ते है। दोष इन बाबाओ का नहीं इन्हे बनाने वाले अनुयाइयों का है। "कादर मन कहु एक अघारा ,देव-देव आलसी पुकारा। सत्य कि खोज में तल्लीन महात्मा तो इस सांसारिक प्रपंच से दूर ही रहते है।

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  15. सटीक लिखा भाई - बढ़िया - जय हो

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  16. सटीक लिखा भाई - बढ़िया - जय हो

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  17. विश्वास जब अपनी सीमाओं को लांघ देता है तो वही अंधविश्वास बन जाता है..और हिन्दुस्तान में तो ये अंधविश्वास एक बड़ी सच्चाई बन गये हैं जहाँ तैतीस करोड़ देवी देवता लोगों की हर मन्नत को पूरा करने के लिये बैठे हैं वहाँ अंधविश्वास होना लाज़मी है...

    रोचक और प्रभावी लेख..बधाई आपको।।

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  18. एक बात मैंने जो मैंने दिल्ली में गौर किया वो यह था की ज्यादातर धनी लोगों को एक-एक ऐसे बाबा में आस्था जरूर हुआ करता था. शायद लक्ष्मी के गतिमान रहने का वह एक जरिया हो. ईश्वर में आस्था होना बहुत अच्छी बात है. लेकिन जब ही यह अंधविश्वास का रूप धरता है, अक्सर कुछ अनिष्ट ही होता है. आसाराम से पहले भी कितने ढोंगियों के उजागर होने के बाद भी लोग चेत नहीं पाये हैं. सुन्दर चिंतन.

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  19. हर जगह ढोल में पोल है |बाबा लोगों को धर्म की आड़ में ठगते हैं |उम्दा लेखा |
    आशा

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  20. सच्चे संत अंधविश्वास को नहीं, ईश्वर में विश्वास को बढ़ावा देते हैं। आज कल के संत ने अपने आचरण से जो परिभाषाएँ गढ़ी हैं वो कहीं से भी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए ।
    सत्संग और धर्मोपदेश तो अर्थोपार्जन का माध्यम बन कर रह गया है। लोगों को इस छलावे से बाहर आना चाहिए।



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  21. Namashkar, mujhe nahi pata ki tum ye sab kya soch ker likh rahey ho but haan itna zaroor kahungi kabhi bhi lyf mai sirf blindly kisi ko blame nahi kerna chahiye jab tak khud k pass koi proof nahi ho, nahi bol dena chahiye.Bahut hurt hua tumahri is post ko read kerke tum bhi un logo mai sahmil ho sakte ho jo sirf Paid media per belev krte hain nahi socha tha... hum kisi ka opinion nahi badal sakte tumhari soch tumahre sath hai but I didn't expect dat frm u .U knw ye hum hindo logo ki kami hai jo Khud ke Sant mahatma per bahut jaldi ungli utha dete hain chahe Maa MEERA HO MAA SEETA HO gAUTAM BUDDHA HO, SANT KABIR DAS HO, KANHA JI HO... JINHONE BHAGWANO KO NAHI chhoda wo jeewit insaano ko kya chhodengey.. bahut easy hai but jab tak sach ki jado tak nahi pahunch jatey aise kisi ki chhavi ko kharab nahi kerna chahiye..ye jitney bhi Paid channels hain humare hindu dharm haumari hindu sanskriti k against hain kabhi tym mile tou zaroor dekhna. ek ladki ne blame kiya chal padey new channles wale unhe blame kerne, kya un Kroro bhakto ki baat sunai gayi kisi news channels per???? U knw wat Vikesh hum ager Fren bhi banate hain na tou bahut soch samajh ker banate hain theek isi tarah ager hum kisi ko maan de rhe hain tou tumhe nahi lagta ki koi na koi reasns tou honge he nahi.. anyways shyad bahut jyada keh diya hai actually bahut hurting laga kyunki tum aisi soch rkhte ho baaki tou outsider bahut cheap words use krte hain Mere Guruji k liye .. ek reqst hai agr tym mile tou kuch links send krungi hope tum zaroor dekhna.. SOrry wid joining hands...Maaf ker dena bahut kuch likha.. Jai Guru Dev

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  22. http://youtu.be/zXmVq3YukNE

    resting must watch dis..

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  23. BholaNand's shocking confession ‘Asaram Bapuji is INNOCENT’. No Paid Media coverage! #FairTrial4Bapuji http://youtu.be/9zHltif9A08




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  24. Bhola's shocking confession ‪‎Asaram‬ ‪#‎Bapuji‬ is INNOCENT! No ‪#‎paidmedia‬ coverage http://t.co/0LI2EYWdQy ‪

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  25. Mera vishwas abhi bhi wahi hai jo pehle tha. Vishwas aise he nahi hota kisi per materialistic lyf hai koi easily kisi per trust nahi kerta isly mera turst mera faith blind tab bhi nahi tha aaj bhi nahi hai.. Gussa us din bhi nahi aaya tha aur aaj bhi nahi kyunki jab tak hum kisi cheez ko jante nahi hai ya tou uske liye humari approach negative hoti hai ya positive tumhari negtv thi wo tumhari liye sahi thi, meri positive thi hai wo mera trust hai jo blind nahi hai. tab bhi nahi tha aur aaj bhi nahi hai..Blidly follow aaj tak kisi ko nahi kiya khud bhi nahi tou kisi aur ko tou impossible hai. Sorry..,.Jai Guru Dev.

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  26. पोस्‍ट में जिस मित्र का जिक्र है, वो आप नहीं हैं।

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  27. Tumahra blog isly open kiya tha kyunki tum bahut acha likhte ho , bahut natural hota hai wo sab jo tum apne words mai likhte ho , bahut tuching hoti hai wo feelings jo share kerte ho isliye socha tha kuch read krna chahiye :) but shyad by mistake galat chapter open kiya.. Its Ok mai nahi bhi hun but jahan tak mujhe yaad hai u asked me dat same qns.. Anyways mai nahi bhi hun tou bhi maine jo sab likha wo meri reality hai aur mere jaise millinos followers ki hai jo itna kuch hone ke baad bhi still mere Guruji ke prati abhi bhi shrddha rkhey hue hain , Last 50yrs se Guruji sewa mai hain sudnly ek ladki ne kuch kaha aur usi ko Paid News ne conspiricay k thru logo tak pahuncha diya.. tab kahan jate hain Paid News channels jab koi Muslim Maulvi ghinoney kaam krte hue pakda jata hai?? tab kahan jati hai Media jab koi Christian PoP pakda jata hai?? Amazing na?? sirf ek Ladki ka sach ya phir millions logo ka sach jo shyd last 45 ya 50 yrs se Guruji ko maante hain aur abhi tak tikey hue hain mere Guruji k saath hain.. kya sahi hai kya galat hai tym wil show d truth n dat day wil definitely cum :) Sorry If I hurt.. May Luck be always wid u.. Jai Guru Dev.

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  28. आज इन तथाकथित साधुओं ने सम्पूर्ण साधु समाज को शक और अविश्वास के घेरे में ला दिया है..अफ़सोस है की इतना कुछ सामने आने के बाद भी बाबाओं आदि की अंधभक्ति में लोग अब भी लगे हैं...

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