महत्‍त्‍वपूर्ण आलेख

Sunday, July 28, 2013

नयन बेचारे


धुन्‍ध नहीं कोहरा भी है अविद्यमान
चमकती वर्षा बूंदें गिर रहीं अविराम
जलबूंदों के असंख्‍य हार
आकाश का धरती को उपहार
नदियां नाले नहर पोखर तालाब
बरस चुके जल से लबालब
इन्‍द्रधनुष का आकर्षण
रंग-बिरंगा ये जलतरंग
इसे देख गांववासियों का कहना
दो-एक दिन अब न होगा बरसना
गाढ़े श्‍वेत प्रशांत घनदल रहे भटक
फिरते यहां-वहां जाते पानी के तलहट
बरसा बिखरा ठहरा बहता जल लेकर
पुन: लौट आते अम्‍बर में अपने घर
नीलनभ के पदचिन्‍ह बनकर
घन बैठे रंगपट्टियों से सजकर
रात इधर धरती पर
घनहीन व्‍योम है ऊपर
जुगुनू टिमटिमाते धरती के इधर
पुष्‍प व्‍योम का चन्‍द्रमा उधर
उसके साथ चमचम करते तारे
मैं बेकल आकाश देखते नयन बेचारे



                          

15 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति!!

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  2. इस बेकली को दूर करें ... यूं तन्हाई में न रहें .. जुगनुओं ने भी रौशनी दी है कोई हमसफ़र ढूंढ लें ...
    सावन के महीने की खुशबू को बांधा है ...

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  3. इतने सुंदर वातवरण में आपके नयन क्यूँ बेकल हैं जी आप भी इस सावन का आनंद लीजिये...के एक बार गया जो यह सवान, तो फिर लौटकर अगले साल ही आएगा।:)सुंदर भावभिव्यक्ति...

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  4. 'आकाश देखते बेकल नयन बेचारे'
    ज्यादा अच्छा लगता . इस छोटी-सी कविता में बदलते प्रकृति को आपने जो समेटा है तो शब्द भी कुछ-कुछ बदले से लग रहे है ..

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  5. बढ़िया सौन्दर्य
    प्रियवर-
    आभार
    तालाबों ने पार की, सरहद फिर इस बार |
    वर्षा का वर्णन विशद, मचता हाहाकार |
    मचता हाहाकार, बड़े खुश हैं अधिकारी |
    राहत और बचाव, मदद आई सरकारी |
    नहीं दिखे सौन्दर्य , दिखे उनका मन काला |
    गया गाँव जब डूब, लगाएं फिर क्या ताला ||

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  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  7. बहुत सुन्दर भाव लिए वर्षा की कविता.
    आकाश से बरसाती बूँदें बेकली बढाती ही हैं.

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  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति,विकेश जी सुन्दर रचना।

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  9. बहुत ख़ूबसूरत प्रकृति चित्रण...बहुत प्रभावी रचना...

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  10. सुंदर भावभिव्यक्ति...

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  11. अभिव्यक्ति की सुन्दर छटा।

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  12. ज़बरदस्त समां बाँधा है. अति सुन्दर.

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  13. चमकती वर्षा बूंदें गिर रहीं अविराम
    जलबूंदों के असंख्‍य हार
    आकाश का धरती को उपहार
    नदियां नाले नहर पोखर तालाब
    बरस चुके जल से लबालब
    इन्‍द्रधनुष का आकर्षण
    रंग-बिरंगा ये जलतरंग

    बहुत सुंदर चित्रण !

    प्रिय बंधुवर विकेश बडोला जी
    इस रचना के लिए बधाई और आभार स्वीकार करें ।

    हार्दिक मंगलकामनाओं सहित...
    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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