Saturday, April 27, 2013

आनन्द का अन्तिम सफर








राजेश खन्‍ना के निधन के बाद 28 07 2012 को रचित संस्‍मरण।



माज में दो तरह के लोग रहते हैं-अमीर और गरीब या कहें नामी व गुमनाम। प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन में जो उतार-चढ़ाव होते हैं, आम आदमी को उनकी सैद्धांतिक जानकारी नहीं होती। इसी तरह आम आदमी के जीवनकाल में जो प्रसंग-परिस्थितियां होती हैं, प्रसिद्ध हस्ती का उनसे चाहा-अनचाहा सरोकार होता है। हिन्दी सिनेमा के महान अभिनयकार राजेश खन्ना का जीवन महान होने के साथ-साथ पारिवारिक त्रासदी की विडंबना से भी पूर्ण था। लोगों की दृष्टि में एक ओर वे अप्रतिम अभिनय प्रतिभा के धनी थे तो दूसरी ओर वे उनके पारिवारिक जीवन के बारे में प्रवचन करते समय उनकी व्यक्तिगत कमियों का रोना भी रोते थे। कोई कहता कि वे अधिक मदिरा का सेवन करते थे...किसी के मुंह से निकलता कि उनके कई लड़कियों से प्रेम सम्बन्ध थे....कोई उन्हें व्यवहारकुशलता में पिछड़ा हुआ सिद्ध करता तो किसी के लिए वे कुंठित होकर रोगग्रस्त व्यक्ति के समान थे और कोई तो उन्हें आत्ममुग्ध कहते अघाता नहीं था। लेकिन इतने प्रवचनों, लांछन और कयास लगाने के बाद लोग भूल जाते हैं कि उनकी ओर से कभी किसी बात के प्रत्युत्तर नहीं आए। वे अपने लिए की जानेवाली टिप्पणियों पर सफाई देने के लिए सार्वजनिक तौर पर कभी नहीं मचले। उन्होंने विसंगतियों से समझौता नहीं किया। शायद इसीलिए वे सिनेमा की अभिनय-यात्रा के प्रकांड होते हुए भी अभिनय इतर गतिविधियों से विमुख ही रहे।
समाज से कट कर एकात्म हो कर रह रहे सुपरस्टार पर लगे अनेक आरोपों का एक ही उत्तर है.....प्रेम-विहार, विचरण, व्याप्ति की वास्तविकता और प्रासंगिकता, जिसे जतिन यानी राजेश खन्ना नामक प्रेमप्राणी आज के विनाशी युग में भी साकार कर रहा था। यदि कोई अपने प्रेम सम्बन्धों के प्रति भावनाप्रद और संवेदनशील रह कर विसंगत सामाजिक जीवन से विमुखता प्रदर्शित करता है तो इसके नकारात्मक अर्थ नहीं लगाए जाने चाहिए। कह सकते हैं कि कलयुग में भी कोई प्रेम सागर में डूबा हुआ है......राजेश खन्ना के साथ भी यही स्थिति थी। वैसे सच्चे प्रेम सम्बन्धों की पराकाष्ठा राजेश खन्ना के जीवन के समान ही होती है। अन्तर यहां से उत्पन्न होता है कि आम आदमी तो रोजी-रोटी के धक्कों में प्रेम की भावना भूल जाता है जबकि प्रतिष्ठित, धनसम्पन्न व्यक्ति के लिए अपनी प्रेम भावनाओं में बहने के लिए रोजगार की चिंता की बाध्यता नहीं होती। समाज के प्रत्यक्ष ताने सहने के लिए आर्थिक अवलम्ब का अभाव नहीं होता। कोई यदि धनवान रहते सच्चे प्यार में पड़ता है तो उसकी सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक विवशताएं निर्धन व्यक्ति से अलग होती हैं। वह इनके मध्य समायोजन और समझौता करने का अधिकारी बना रहता है। प्यार की पवित्रता जीने के लिए जरूरत बस इतनी होती है कि अमीरी की सामाजिक विसंगतियों से दूर रहना पड़ता है। आधुनिकता के वर्तमान चोंचलों से कटना पड़ता है। मेरे विचार से रोटी’’ का मंगल इन सब सन्दर्भों में शत-प्रतिशत खरा उतरा। इसके प्रमाण में इतना कहना पर्याप्त होगा कि बचपन से अमीरी में पला और नौजवानी आते-आते हिंदी सिनेमा के शिखर पर विराजमान हुआ राजेश अपनी अभिनयगत भावप्रवणता में एकदम जींवत लगता था। अभिनय की दुनिया से बाहर वास्तविक जीवन में भी उसकी भावुकता एक श्रेष्ठ वैयक्तिक मनोविज्ञान की परिणति थी। इसी दम पर वह अपने दर्शकों और चहेतों के दिलों में राज करता था......कर रहा है....और निसन्देह करता रहेगा। दारा सिंह के बाद एक और हस्ती राजेश खन्ना का महाप्रयाण भारतीय भूखण्ड के लिए अत्यन्त दुखदायी है। ऐसे लोगों का जीवन दृष्टांत और मृत्यु मर्म आम आदमी को कहीं न कहीं एक ऐसे दर्शन से जरूर जोड़ता है, जिसमें मनुष्यता अपनी सम्पूर्ण नैतिकता में विचरती नजर आती है। राजेश खन्ना की आत्मा के लिए शांति प्रार्थना के साथ-साथ उनके अन्तिम संस्कार में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित भावप्रण लोगों और आनंदके बैकुंठ सफर से उदित मानवता को सादर प्रणाम।

14 comments:

  1. सुन्दर और जानकारी भरी प्रस्तुति।

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  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुतीकरण.

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  3. कथित सन्दर्भों में 'दुश्मन चाचा' को भी नही भुलाया जा सकता । बहुत सुन्दर ।

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  4. राजेश खन्ना को कभी नहीं भुलाया जा सकता है अच्छी जानकारी....आभार

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  5. राजेश खन्ना को कभी नहीं भुलाया जा सकता है अच्छी जानकारी....आभार

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  6. भाई बढ़िया लेख | अच्छी जानकारी उपलब्ध कराई आपने | बढ़िया लेखन | यदि प्रेम सच्चा है और ह्रदय अच्छा है तो कोई कुछ भी कहे चुप रहना चाहियें और किसी को कुछ सफाई नहीं देनी चाहियें | काका वैसे भी हमेशा हमारे सब के दिलों में अमर रहेंगे |

    मेरा एक और मानना है के इंसान को अपने दुःख से कभी कोई सरोकार नहीं होता उसे दूसरों के सुखों से और उनकी उन्नति से पीड़ा होती है इसलिए लोग ऐसे जानी मानी हस्तियों की निजी जिंदगियों में झांकना पसंद करते हैं खुद चाहे कितने ही गर्क़, दुःख, पीड़ा में पड़े हों परन्तु दुसरे के निजी जीवन में क्या चल रहा है इसकी खबर ज़रूर चाहियें |

    काका को भावभीनी श्रद्धांजलि | भगवान् उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें | जय हो |

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  7. ललित निबन्ध का निबन्ध का आस्वाद लिए रहा यह संस्मरण .

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  8. नमस्कार
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (29-04-2013) के चर्चा मंच अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
    सूचनार्थ

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  9. प्रेम के परिपेक्ष्य में मनोभावों का अति सुन्दर विश्लेषण..

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  10. भाई साहब आपकी निरंतर टिप्पणियों के लिए आभार .

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  11. अच्छी जानकारी

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  12. आनंद को अमर प्रेम में देखिये या फिर आराधना में ...एक ऐसा कलाकार जो बहुत कुछ दे गया है ....
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    बढ़िया विश्लेषण

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  13. बहुत सुन्दर विवेचन...

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  14. 'काका' को समर्पित इस लेख से मालूम होता है कि बहुत अच्छा और गहन अध्ययन किया है आप ने!
    कभी नहीं बहलाया जा सकने वाला फ़िल्मी दौर दिया है राजेश खन्ना जी ने.
    श्रद्धांजलि.

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