Sunday, February 10, 2013

एक गांव में चांदनी रात में



एक गांव में  
चांदनी रात में
दो ऊँचे पहाड़ों की गहराई में
पहाड़ों की गहराई में अन्‍धेरा, आकाश पर चांद उजियारा
फैला अन्‍धेरा
वृक्षों, पत्‍तों के हिलने से
धरती पर बनता
उनकी परछाई का घेरा
एक अनजान प्राण के लिए
आहें निकलवाता, उदासी बढ़ाता
मन बहकता, स्‍मृति-संसार उमड़ता
रहस्‍यमय यात्रा प्रारम्‍भ हो जाती
ठोस द्रव्‍यप्रधान समाज
एकदम से पीछे छूट जाता
हृदय मेरा नभ बन कर
भाव-सितारों से घिर जाता
पृथ्‍वी पर पसरीं हुईं
पेड़-पौधों की शांत छायाएं
दूर तक स्‍नेह-पथ का निर्माण करतीं
शीतल पवन झोकों से आती अमृताभा
सांसों में स्‍वर्गमयी जीवन के प्राण भरती
रोगों, कष्‍टों, दर्द-पीड़ाओं का
निवारण होता
मनुष्‍य सुख-शांति चरमोत्‍कर्ष पर
दुखों का विसर्जन होता
एक गांव में
चांदनी रात में


9 comments:

  1. उम्दा उदगार |बधाई
    आशा

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  2. बहुत ही सुन्दर उद्गार..अलग अलग पंक्तियों में लिखने से पढ़ने में अधिक आनन्द आता।

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  3. बेह्तरीन अभिव्यक्ति

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  4. बहुत खूब ... चांदनी रात वो भी गाँव की ... क्या कुछ कर जाती है ...

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  5. बहुत सुन्दर , कविता पढ़कर ऐसा मन करता है कि इस शहर को छोड़कर गाँव मैं बस जाये. फिर वही गाँव हो और वही चांदनी रात हो...........

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  6. शब्दों से बिखरती हुई चांदनी..

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  7. बेहतरीन भावाभिव्यक्ति !

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  8. लाज़वाब शब्द चित्र...मन कुछ पल को सब भूल कर पहुँच गया उस अप्रतिम चांदनी रात में...

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  9. शानदार, लाजवाब, जो कहूँ इस पोस्ट के लिए कम है :)

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