Wednesday, January 9, 2013

प्‍यार होगा, संसार होगा

आजकल दो मनुष्‍यों का मिलाप
कितना बड़ा है अभिशाप

किसी से औपचारिकतावश मिले
दो पग आगे बढ़े विदा हुए

मिलनेवाले को भूल गए
उसके बाद ज्ञात नहीं दोनों की...
....क्‍या स्थितियां हैं

आत्‍मसात् उनके जाने....
....कौन सी परिस्थितियां हैं   

बस एक रात के लिए हम अपनी
अलग दुनिया बसाते हैं
अगली सुबह अपने लिए पुन:
एक नई दुनिया पाते हैं

वहां दोबारा दो मनुष्‍य मिलते हैं
विवशता से, औपचारिकता से...
...व्‍यवसाय से और एक-दूजे से
दूर होने के लिए

किसी को मिलकर क्‍या होगा
मैं क्‍या हूं....यह पहले जानना होगा
अपनी गति देखनी है
अपना विवरण जानना है
आत्‍मसात् बुराईयों को त्‍याग
अच्‍छाईयों का साथी होना है

तब ही हम किसी से
कोई हम से 
औपचारिकता से नहीं मिलेगा
स्‍वाभाविक आकर्षण का पुष्‍प खिलेगा

कोसों दूर रहकर भी 
यादों में मन जलेगा
भागकर दो प्राणी 
परस्‍पर मिलेंगे
तब प्‍यार होगा
संसार होगा                

6 comments:

  1. बहुत ही भावात्मक प्रस्तुतीकरण,आभार.

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  2. वाह भाई ! बेहतरीन

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. किसी को मिलकर क्‍या होगा
    मैं क्‍या हूं....यह पहले जानना होगा

    ...आज का यथार्थ...काश निस्वार्थ प्यार को लोग समझ सकें..बहुत सुन्दर

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  4. कोसों दूर रहकर भी प्यार होगा ,

    एक अप्रतिम मिलन ,संवाद होगा .

    बढ़िया प्रस्तुति .

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  5. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  6. यही है नियति से मिलन

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