Sunday, January 20, 2013

तब क्‍या होगा?

हमें अपने पैरों को देखकर
ोचना चाहिए
कि कल जब ये हमें
जवाब दे देंगे
तब क्‍या होगा?


जब आंखें कहेंगी
उन्‍हें मत खोलो
रहने दो बन्‍द
कान भी मौन तक का आभास
न पा सकेंगे
तब क्‍या होगा?

यदि हम भाग्‍यवान रहे
कोई देवस्‍वरुप हमारा साथी
हमारे निकट बैठा हो उस समय
कझोर रहा हो वो हमें
हमारी एक ध्‍वनि के लिए
पर जिहवा जैसे
अनगिन रेगिस्‍तान में 
भटकते-भटकते    
प्‍यास के मारे 
ठते-उठते बैठ जाए 
 तब क्‍या होगा?     

6 comments:

  1. जगत रहा मन से संचालित..मन दृढ़ रहा तो जिजीविषा बनी रहेगी।

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  2. यहां अपना समय देने के लिए आप लोगों का साधुवाद।

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  3. तब भी कोई राह अवश्य खुल जाती है .

    वैसे मैंने अभी किताब के विषय में सोचा भी नहीं है . अभी तो कितनी मंजिलें टी करनी है.ये तो बस शुरुआत ही है.

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  4. वाह भाई गज़ब का लिखा है | आभार

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