Saturday, January 12, 2013

हथेली में तिनका छूटने का अहसास

मैं बिखर गया
मेरा ओर-छोर बिखर गया।
मेरी हथेली में
तिनका छूटने का,
सास रह गया।।

कुन्‍द पड़ गए सब रंग
बेरंग संवेदना हो गई
मेरा जीवन उड़ती धूल का,
आकाश रह गया 
मेरी हथेली में
तिनका छूटने का,
सास रह गया।।

सच्‍चा साथ नहीं है
दुखता गहराता यह आभास।
अंत:स्‍थल पीड़ा परिपूर्ण
व्‍याप्‍त पीड़ाओं का कारावास।।
मृतप्राय: मानवों से अपने...
...प्राणों का अभिनन्‍दन करवाता,
निष्‍प्राण मेरा 
सारांश रह गया।
मेरी हथेली में
तिनका छूटने का,
सास रह गया।।

चक्षु खोलने पर
हाहाकार दुनिया का,
मुझे जंचता नहीं।
ध्‍यानस्‍थ रहकर
ाक्षात्‍कार ईश्‍वर का,
कभी होता नहीं।।    

रंग थे मेरे भीतर
तितलियों की चंचलता थी
मानव मैं
मशीनी सहवास हो गया।
मेरी हथेली में
तिनका छूटने का,
सास रह गया।।


 

  

7 comments:

  1. विकेश भाई बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना | मैं जितनी आपकी लेखनी को पढता जा रहा हूँ उतना ही आपके लेखन का मुरीद होता जा रहा हूँ | क्या उपमाएं क्या अलंकारों का प्रयोग करते हैं आप धन्य है | मंत्रमुग्ध कर देने वाली कविता | बहुत बहुत आभार और आने वाली होली की आपको अग्रिम बधाइयाँ |

    ReplyDelete
  2. सार्थक भाव लिए सुंदर एवं भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  3. सुंदर भावाभिव्यक्ति ..

    ReplyDelete
  4. मृतप्राय: मानवों से अपने...
    ...प्राणों का अभिनन्‍दन करवाता,
    निष्‍प्राण मेरा
    सारांश रह गया।

    ...बहुत खूब! अंतस के भावों का बहुत उत्कृष्ट और सटीक चित्रण..अंतस को छूते गहरे अहसास...

    ReplyDelete
  5. बढ़िया पोस्ट शुक्रिया आपकी टिप्पणियों का .बढ़िया अभिनव प्रतीक विधान मशीन के साथ सहवास का अभिनव रूपक .

    ReplyDelete
  6. प्राणों का अभिनन्दन करवाता ,

    निष्प्राण मेरा सारांश रह गया .

    हथेली में तिनका छूटने का एहसास रह गया .बे -हतरीन अभिव्यक्ति भाव और जीवन की रागात्मकता से संसिक्त .

    ReplyDelete
  7. भावपूर्ण .... तिनका छूटने का एहसास सब कुछ खो देने से कम नहीं ...

    ReplyDelete