Thursday, January 3, 2013

विश्‍वास करनेवाली बात




अपने रहने के स्‍थान के लिए / जहां मैं एकांतवास हूं / पग बढ़ते
पीछे छूटती कुछ दृष्टियां लोगों की / जिनसे होकर गुजरने पर
/ कभी मैं स्‍वयं को सुन्‍दर समझता और कभी मरणासन्‍न / पीछे छूटा सुन्‍दरतम् गगन / रात्रि में चन्‍द्रमा और भव्‍य सितारों का साथ / मैं स्‍मृतियों के सहार/ अन्‍धेरी चाहरदीवारी की ओर बढ़ता / ह्रदय पर बोझ कि बाहरी वातावरण, आकाश, चन्‍द्रमा और सितारों को मत छोड़ / पर इनको देखते रहने से मन अचेत हो जाएगा / यह सोचकर दिल को पत्‍थर बनाया / आंख बन्‍द करके निद्रालीन हो गया / एक रात्रि के लिए पुन: स्‍मृतिविहीन हो गय/  आशा हुई कि स्‍वप्‍न में संसार की निस्‍सारता का हल मिलेगा /  पर यहां भी मैं भाग्‍यविहीन हू/ एक बात से संतुष्टि होती है / कि अंत:स्‍थल में गुजर चुके लोगों की स्‍मृति से एक हलचल होती है
/ इसका रंग चन्‍द्रमा और तारों की तरह है और ह्रदय आकाश जैसा / यह विश्‍वास करनेवाली बात है।
गद्य स्‍वरुप में कविता

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