Monday, December 17, 2012

अधिकारों के प्रति समर्पित अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस



अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस हर साल १८ दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने सर्वप्रथम ४ दिसंबर, २००० को दुनियाभर में रह रहे प्रवासियों की बड़ी और बढ़ती हुई संख्‍या को ध्‍यान में रखकर यह दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया। अट्ठारह दिसंबर, १९९० को महासभा ने प्रवासी कर्मचारियों और उनके पारिवारिक सदस्‍यों के अधिकारों की सुरक्षा पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन किया था। यह दिवस अनेक देशों, अंतरसरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में प्रवासियों के मानव अधिकारों और उनकी मौलिक राजनीतिक स्‍वतंत्रता पर सूचना प्रचार-प्रसार के माध्‍यम से मनाया जाता है। इस दिन प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए सुरक्षा सम्‍बन्‍धी उपायों, अनुभवों और कार्रवाईयों की नई रुपरेखा बनाने पर भी सहभागिता की जाती है।
सन् १९९७ में फिलिपिनो और दूसरे एशियाई प्रवासी संगठनों ने १८ दिसंबर को प्रवासी एकजुटता अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस के रुप में मनाना और फैलाना शुरु किया। इस दिन को इसलिए चुना गया, क्‍योंकि १८ दिसंबर १९९० को इसी दिन संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने समस्‍त प्रवासी कर्मचारियों और उनके पारिवारिक सदस्‍यों के अधिकारों के संरक्षण पर प्रथम अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन आयोजित किया था। अट्ठारह दिसंबर की इस पहल पर, सन् १९९९ में अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस की संयुक्‍त राष्‍ट्र में आधिकारिक प्रविष्टि के लिए भावी कार्यक्रमण तैयार करते हुए अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी अधिकार तथा प्रवासी अधिकार अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन अनुसमर्थन की वैश्विक अभियान परिचालन समिति और अनेक अन्‍य संगठनों के सहयोग से एक ऑनलाइन अभियान की शुरुआत हुई। इससे दु‍निया के तमाम सरकारी, गैर-सरकारी संगठनों के लोग जुड़ते चले गए और परिणामस्‍वरुप महासभा द्वारा अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस की आधिकारिक तिथि की घोषणा कर दी गई। इस प्रकार अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय ने प्रवासियों के मानवाधिकारों को विशिष्‍ट रुप से दर्शाने के लिए वर्ष २००० से १८ दिसंबर को अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस के तौर पर मनाना शुरु किया। यह एक महत्‍वपूर्ण कदम था। क्‍योंकि इससे प्रवासियों की सुरक्षा के लिए भीड़ जुटाकर आवाज उठानेवालों को धरना-प्रदर्शन करने की एक तरह से इजाजत दे दी गई। महासभा ने प्रवासियों के मानवाधिकारों और मौलिक आजादी पर सूचना प्रसार, अनुभवों को बांटने तथा प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने द्वारा अपने सभी सदस्‍य राज्‍यों, अंतरसरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को यह दिवस मनाने का निमन्‍त्रण दिया। अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस को सर्वप्रथम परदेश और स्‍वदेश की अर्थव्‍यस्‍था में लाखों प्रवासियों द्वारा किए गए योगदान को मान्‍यता देने के एक अवसर के रुप में देखा जाता है। इसके बाद उनके मूल मानवाधिकारों को सम्‍मान देने की बात आती है।
तमाम अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवा‍सी दिवस आयोजनों का मकसद प्रवासियों की गुहार सुनकर उनके अधिकारों की संरक्षा के लिए रास्‍ता निकालना ही है। आज दुनियाभर में विभिन्‍न व्‍यापारिक-सामाजिगतिविधियां संचालित की जा रही हैं। लोग रोजगार के लिए अपना देश, मूल निवास छोड़कर परदेश-विदेश में रहते हैं। अकसर अपना मुल्‍क छोड़कर दूसरे मुल्‍क में अपने मौलिक अधिकारों को कैसे प्राप्‍त किया जाए, प्रवासी जनमानस के इस प्रश्‍न पर ही संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने प्रवासी दिवस मनाने की परंपरा अपनाई। आज यह परंपरा समूची दुनिया में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक वैश्विक एकीकृत प्रयास बनकर उभरी है।
 निश्चित रुप से यही भाव रेडियो १८१२ की चिंता के केन्‍द्र में भी है, जो विश्‍व में प्रवासियों के अधिकारों के मुद्दों को प्रस्‍तुत कर रहा है। मनीला के रेडियो १८१२ की शुरुआत १८ दिसंबर, २००६ को हुई। यह एक वैश्विक आयोजन है, जो दुनियाभर के प्रवासी समूहों और रेडियो केन्‍द्रों के माध्‍यम से प्रवासियों की वैश्विक चिंताओं को प्रदर्शित करते हुए उनकी उपलब्धियों का आयोजन कर रहे कार्यक्रमों का प्रसारण करता है और उनमें सहभागिकता करता है। एक तरफ यह रेडियो है जो विश्‍वभर के प्रवासियों के अधिकारों के प्रति सजग है। इस क्रम में उसने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में कई अहम प्रस्‍ताव रखे हैं। इनका मुख्‍य उद्देश्‍य प्रवासियों के मानवाधिकारों की संरक्षा कानून को देश, काल, समय के अनुसार सशक्‍त बनाना है। दूसरी ओर आस्‍ट्रेलियाई रेडियो है, जिसके दो जॉकियों की वजह से निर्दोष भारतीय मूल की नर्स की मौत हो गई। इन रेडियो जॉकियों की मस्‍ती कॉल ने लंदन स्थित किंग एडवर्ड सप्‍तम अस्‍पताल की दो बच्‍चों की मां नर्स जैसिंथा सलदान्‍हा की जीवन लीला समाप्‍त कर दी। उल्‍लेखनीय है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और प्रिंस चार्ल्‍स बनकर जॉकी ने नर्स से बात की। डच्‍चेज ऑफ कैंब्रिज केट मिडिलटन की देखभाल कर रही नर्स को किए गए मजाकिया फोन कॉल ने इस रेडियो स्‍टेशन में हड़कंप मचा दिया है। रेडियो स्‍टेशन के फेसबुक एकाउंट पर लोगों की रोषपूर्ण प्रतिक्रियाओं का अम्‍बार लग गया। लोगों ने प्रस्‍तोताओं को रेडियो से निकालने की सिफारिश की है। शनिवार दोपहर ११ बजे तक ११ हजार से अधिक लोगों ने नर्स की मौत की दुखदायी घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं व्‍यक्‍त कीं।
भारतीय मूल के प्रवासियों के साथ कई दुर्घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। हाल ही में स्‍पेन में भारतीय मूल की महिला दंत चिकित्‍सक सविता हल्‍लपनवार की गर्भधारण के दौरान हुई दर्दनाक मौत से मानव अधिकार उल्‍लंघन पर खूब वैश्विक हलचल हुई। इसके तुरंत बाद आयरलैंड के ओस्‍लो में भारतीय दंपत्ति वल्‍लभनेनी को अपने सात वर्षीय बच्‍चे को डांटने-डपटने पर वहां के कानून द्वारा सजा देना भी एक किस्‍म की अंतर्राष्‍ट्रीय मानवाधिकार उल्‍लंघन की घटना थी। हालांकि इस घटना में मानव अधिकार के उल्‍लंघनकर्ता और इससे पीड़ित एक ही परिवार के सदस्‍य थे। इन अंतर्राष्‍ट्रीय घटनाओं ने मानवाधिकारों के प्रति अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का ध्‍यान खींचने का काम किया है। इन घटनाओं के परिप्रेक्ष्‍य में अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस की प्रासंगिकता पहले से ज्‍यादा हो गई है। इन घटनाओं के तेजी से प्रकाश में आने के पीछे प्रवासी अधिकारों के कार्यकर्ताओं और प्रसारकों का विशेष योगदान रहा। आशा है कि अंतर्राष्‍ट्रीय प्रवासी दिवस मनाते समय इसके मुख्‍य संचालनकर्ता भारतीय मूल के लोगों के साथ हुईं अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और पीड़ितों को समुचित न्‍याय दिलाने के लिए प्रवासी अधिकार संरक्षण कानून को और लचीला बनाने की दिशा में काम करेंगे।
मंगलवार 18 दिसंबर 2012 को राष्‍ट्रीय सहारा में

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