महत्‍त्‍वपूर्ण आलेख

Tuesday, November 6, 2012

मिट्टी से विश्‍वासघात




आज के जिन कठिन हालात से जनसाधारण जूझ रहा है निश्चित रूप से यह 66 साला उस सत्ता हस्तांतरण के कारण है, जो अंग्रेजों ने भांग्रेजों यानि भारतीयों को किया था। वैसे लोकतंत्र शब्‍द के अर्थ क्या हों..! यही कि ग्रामों का समुचित विकास हो, ग्राम पंचायतों में सामाजिक गतिविधियों का संचालन हो, विधानसभाएं व संसद स्वराज और विधान के मध्य आदर्श संतुलन स्थापित करते हुए देश में अनुकूलन जीवन-स्थितियों का निर्माण करे! लेकिन नहीं लोकतंत्र शब्‍द तो अपनी छाया से भी दूर जा चुका है। इसके बरक्स एक ऐसा तंत्र खड़ा हो गया है, जिसने जन-जीवन को विसंगतियों का बुत बना दिया है। जिस देश में पथिकों की जल-प्यास को ध्यान में रख कर स्थानीय बस्ती से दूर के मार्गों पर प्याऊ लगवाने के पुण्य कार्य होते आए हों या शायद दूर-दराज क्षेत्रों में अभी भी हो रहे हों, वहां अब दस-बीस रुपए में अपने ही घर का एक लीटर पानी खरीद कर पीने की पूंजी-व्‍यवस्‍था ने अपने लालची पैर पसार लिए हैं। जिस धरती के विद्व आयुर्वेदाचार्यों द्वारा रोगियों का ईश्‍वरीय भाव से उपचार किया जाता था, वहां अब आम आदमी घरबार बेचकर अपना इलाज करा रहा है। जो देश दूध-घी से अपने बच्चों की मांसपेशियों को पुष्‍ट करता था उन्हें भावी आदर्श नागरिक बनाता था, वहां अब मदिरा के ऐसे-ऐसे रासायनिक मिश्रण विद्यमान हैं, जिनके सेवन से मनुष्‍य अपनी ही नजर में इतना बेगाना व अंजाना बन कर उभर रहा है कि उसे जिसके द्वारा जो कुछ भी खिलाया-पिलाया और सिखाया जा रहा है, उसे वह ब्रह्म आर्शीवाद मानकर ग्रहण कर रहा है। मानवीय रिश्‍तों में इतना अलगाव उत्पन्न हो गया है कि किसी के जन्म पर आश्‍चर्यमिश्रित हर्ष और मरण पर अश्रुपूर्ण विलाप धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।
        इन परिस्थितियों में संसदीय प्रतिनिधि कहें कि जनसाधारण को कानून का सम्मान करना चाहिए, संसद का सत्कार करना चाहिए और जनप्रतिनिधियों की नीतियों का आदर करते हुए मर्यादा में रह कर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए तो यह अपने आप में बहुत ही हास्यास्पद व असमंजसपूर्ण स्थिति है। ऐसे में अभी तक यह भलाई तो है ही कि व्यवस्था की समस्याओं के प्रति जनाक्रोश ने हिंसात्मक रूप ग्रहण नहीं किया है, उग्रता नहीं पकड़ी। यह इस धरती की मिट्टी के कारण ही है और दुख इसी बात का है कि विवादों को हिंसा तक पहुंचने से रोकनेवाली इसी मिट्टी से इसी के पथभ्रष्‍ट मानवजीवी विश्‍वासघात करने पर लगे हुए हैं।


No comments:

Post a Comment

Your comments are valuable. So after reading the blog materials please put your views as comments.
Thanks and Regards